ताज महोत्सव में सोमवार की शाम खास रही। ‘मोहन’ की ‘वीणा’ ने श्रोताओं को संगीत की अलग ही दुनिया का सफर कराया। तबला, सितार और गिटार के बीच वीणा ने जब एक के बाद एक राग छेड़े तो श्रोता सुधबुध खो बैठे। एक लंबी तान और तालियों की गड़गड़ाहट। वीणा ने कानों में ऐसा रस घोला कि न सर्द हवाओं का अहसास रहा और न वक्त के खत्म होने का इंतजार। ‘मोहन’ की जब उंगलियां थमी तभी मानो मुक्ताकाशीय मंच के सामने बैठे श्रोता इसके मोहपाश से उबर पाए।
विश्व विख्यात प्रतिष्ठित ग्रेमी अवार्ड से नवाजे गए और पद्मश्री से सम्मानित पं. विश्व मोहन भट्ट ने सोमवार रात ताज महोत्सव के दौरान शिल्पग्राम में अपने संगीत से पूरब और पश्चिम का मिलन कराया। पश्चिमी गिटार और पूरबी वाद्ययंत्र वीणा के संयोजन से मोहन वीणा का सृजन करने वाले पंडित विश्व मोहन मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी। उन्होंने राग गावती से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने राग किरवानी, राग जोग, हेम विहाग, नट भैरव, तिलक श्याम छेड़कर सुरों की सरिता बहाई। हालांकि मुक्ताकाशीय मंच के सामने श्रोताओं की संख्या कम ही थी, लेकिन जो थे, वह शास्त्रीय संगीत की समझ रखने वाले ही थे, उन्होंने संगीत की सुरमयी शाम को पूरा लुत्फ उठाया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ अंडमान-निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर एके सिंह ने किया। बता दें कि वर्ष 1971 से अब तक वीणा वादक विश्व मोहन भट्ट के मेघदूतम्, चतुरंग, मोहन वीणा, गैलेक्सी आफ स्ट्रिंग्स सहित करीब दो दर्जन एलबम जारी हो चुके हैं। वह मणिरत्नम की हिंदी-तमिल फिल्म में संगीतकार ए आर रहमान के साथ संगीत भी दे चुके हैं। 1994 में अमेरिका में एलबम ‘ए मीटिंग बाई द रिवर’ के लिए ग्रेमी अवार्ड और फिर 2002 में पद्मश्री से सम्मानित किए गए पं. विश्व मोहन भट्ट पं. रविशंकर के शिष्य रहे हैं।
सूफी गीतों ने बांधा समां
महोत्सव के दौरान मुक्ताकाशीय मंच पर सूफी गायक जमील अहमद ने भी अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने जब ‘सांसों की माला से’ गीत गुनगुनाया तो मंच के सामने बैठे युवा भी जोश में आ गए। वे खड़े होकर झूमने लगे। इससे पहले करतार सिंह ने भजन सुनाकर माहौल में भक्ति का रस घोल दिया। डा. एचपी सिंह और ममता ने भी अपना गायन प्रस्तुत किया। राशि गोयल ने भजन सुनाकर खूब वाह-वाह लूटी।