ताजमहल के शहर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट जरूरी है, लेकिन सत्ता इसे अपने गांव यानी सैफई ले जाने की जिद पर अड़ी है। वह एयरपोर्ट जब बनेगा, तब बनेगा, लेकिन जो सिविल एयरपोर्ट आगरा के पास है, उसे सुधारने के लिए भी सत्ता और सरकार के नुमांइदे गंभीर नहीं दिखते। तभी तो देश भर के 53 एयरपोर्ट पर हुए कस्टमर सर्वे के रिपोर्ट कार्ड में 2015 का सबसे खराब एयरपोर्ट आगरा का निकला। आगरा सिविल एयरपोर्ट संतुष्ट ग्राहकों के इंडेक्स में सबसे नीचे है। एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया के इस सर्वे में आगरा साल 2014 की 3.90 रेटिंग के मुकाबले 2.20 रेटिंग पर आ गिरा, जबकि देश का औसत 4.25 रखा गया था।
एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया ने देश के 53 हवाई अड्डों पर पार्किंग, खानपान, बैगेज, ट्राली, चेक इन, वेटिंग टाइम, पूछताछ, शापिंग, एटीएम, वाशरूम, सफाई, कर्मचारियों की सहायता जैसे 33 मुद्दों को लेकर सर्वे किया। इसमें आगरा एयरपोर्ट को सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। आगरा से बेहतर तो प्रदेश के बाकी हवाई अड्डे इलाहाबा, वाराणसी और लखनऊ हैं। अथारिटी ने इंडेक्स के लिए जो मानक तय किया, आगरा उसका आधा भी नहीं पा सका।
चंडीगढ़ सबसे बेहतर, आगरा सबसे खराब
इस सूची में चंडीगढ़ 4.84 अंक पाकर अव्वल रहा, जबकि वाराणसी 11 वें नंबर पर है। इलाहाबाद 41 नंबर पर और आगरा सबसे नीचे। साल 2014 में आगरा की रेटिंग 3.90 थी और यह जबलपुर, इलाहाबाद, गोरखपुर, इंफाल, लेह, विजयवाड़ा जैसे शहरों से आगे था, लेकिन 2015 में आगरा एयरपोर्ट पर बदहाल सुविधाओं से यह 2.20 अंक ही पा सका। पूरे देश में सबसे ज्यादा गिरावट आगरा में ही आई।
इलाहाबाद से भी पिछड़ गया आगरा
मुगलों की राजधानी रहा आगरा ब्रिटिश हुकूमत में भी ताकतवर रहा। राजधानी का रुतबा छिनने के बाद से आगरा को सरकारों ने ऐसा उपेक्षित किया कि एयरपोर्ट के मामले में यह इलाहाबाद से भी पिछड़ गया। आगरा में सप्ताह में तीन दिन की एकमात्र उड़ान से महज 2095 यात्री एयरपोर्ट पहुंचे, वहीं इलाहाबाद में हर महीने 2 नियमित उड़ानों से 4014 हवाई यात्री आ जा रहे हैं, तो वहीं वाराणसी से तो आगरा मुकाबला कर ही नहीं सकता। वाराणसी में हर दिन 24 फ्लाइट हैं और हर महीने 1.44 लाख हवाई यात्री सफर कर रहे हैं। लखनऊ में यह आंकड़ा 31 नियमित उड़ान और 2.33 लाख यात्री प्रति माह का है।
हर शहर में 20 किमी परिधि में एयरपोर्ट
प्रदेश सरकार आगरा के नाम पर ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सैफई या भदरौली बनाने के लिए सर्वे करा रही है, लेकिन देश ही नहीं, बल्कि प्रदेश में जिन शहरों में एयरपोर्ट हैं, वह महज 20 किमी परिधि में ही मौजूद हैं। सूबे की राजधानी लखनऊ में एयरपोर्ट शहर से महज 10 किमी दूर है और 1186 एकड़ क्षेत्र में फैला है तो वाराणसी में यह 18 किमी दूर है और 582 एकड़ क्षेत्रफल में फैला है। इसी तरह इलाहाबाद में भी शहर से एयरपोर्ट महज 12 किमी दूर है। आगरा में 55 एकड़ जमीन में सिविल एन्कलेव बनाने में भी अधिकारियों को पसीने छूट रहे हैं। तीन साल से अफसर 55 एकड़ जमीन भी एयरपोर्ट अथारिटी के हवाले नहीं कर सके।
सोशल मीडिया पर छाया एयरपोर्ट का सवाल
आगरा। अमर उजाला ने ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आगरा की जगह सैफई ले जाने की सत्ता की कोशिशों को उजागर किया तो यह शहर के आम जनमानस का सवाल बन गया। पर्यटन से जुड़े 3.5 लाख लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा बना तो सोशल मीडिया पर इसे शब्द मिले। भाजपा नेता राजकुमार पथिक ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर फेसबुक पर पोस्ट करने के बाद लोगों से सवाल पूछा कि वह आगरा या सैफई में कहां एयरपोर्ट बनाना चाहते हैं तो चंद घंटों में ही रात 9 बजे तक 1022 कमेंट और 788 लोगों ने इसे लाइक किया। 46 लोगों ने पोस्ट शेयर कर इस मुद्दे को आगे बढ़ाया। फेसबुक पोस्ट में अधिकांश ने आगरा में ही ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने के हक में कमेंट किए। फेसबुक के साथ सैफई बनाम आगरा का मुद्दा व्हाट्सएप और हाइक जैसे सोशल मीडिया पर भी कई ग्रुप में दौड़ता रहा। कई चुटीले कमेंट भी फेसबुक पर इस संबंध में चले कि ‘ये अफवाह अब कौन उड़ा रहा है कि ताजमहल भी सैफई शिफ्ट हो रहा है’ ‘एयरपोर्ट के साथ ताज भी सैफई शिफ्ट कर दो’।
न्यूमेरिक
565 फ्लाइट पिछले साल पहुंचीं आगरा
2095 हवाई यात्री आ रहे हर माह आगरा
43 फ्लाइट नवंबर के महीने में आगरा आईं
12 एयर इंडिया की शिड्यूल्ड फ्लाइट हर माह
31 चार्टर आए नवंबर में यानी हर दिन एक
33 बिंदुओं पर हुए कस्टमर सर्वे में सबसे पिछड़े हम