एटा। ये एटा शहर है, यहां जो न हो वह कम है। एक ओर सरकार पूरे देश में स्वच्छता का ढिंढोरा पीटने के साथ करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर एटा नगर पालिका परिषद ने शहर को कूड़े के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है। यहां कूड़ा उठाया नहीं जलाया जाता है। पर्यावरण संरक्षण के साथ पालिका लोगों के लिए भी आफत बन रही है। आलम यह है कि पूरा शहर गंदगी और कूड़े के ढेरो से अटा पड़ा है, लेकिन जिम्मेदारों को फिक्र ही नहीं है। 11 बजे तक सड़कों से कूड़ा नहीं उठता। ऐसे में लोगों की दिक्कत बढ़ रही है। पढ़िए रिपोर्ट....
तस्वीर-एक
आग के हवाले कर दी गंदगी
ठंडी सड़क पर पालिका के सफाई कर्मचारियों की कारगुजारी देखने को मिली। कूड़ा उठाने की बजाय कर्मचारियों ने कूड़े में आग लगा दी। आग लगने से उठे धुएं से पर्यावरण प्रदूषण तो हुआ। साथ ही लोगों को भी दिक्कत झेलनी पड़ी।
तस्वीर-दो
कार्यालय के सामने ही ढेर
नगर पालिका कार्यालय के सामने ही कूड़े का ढेर लगा था। पूरे दिन पालिका के अधिकारी-कर्मचारी यहां से गुजरे, लेकिन किसी को भी कूड़ा उठवाने की सुध नहीं आई। जब कार्यालय के सामने कूड़े का ढेर है, तो शहर मेें क्या हाल होगा?
तस्वीर-तीन
फेल हुआ स्वच्छता का नारा
शहर के प्रमुख चौराहा आगरा रोड पर भी कूड़े का ढेर स्वच्छता अभियान की हकीकत को बयां कर रहा था। जानवर कूड़े के ढेर को चारों ओर बिखेर रहे थे। मगर पालिका को कूड़ा उठवाने की सुध नहीं आई।
200 से अधिक सफाई कर्मचारियों की फौज
नगर पालिका में 200 से अधिक सफाई कर्मचारी हैं, लेकिन फिर भी सफाई व्यवस्था बदहाल है। राजनीति के नाम पर पालिका सुर्खियों में रहती है, लेकिन जनता की समस्याओं में फिसड्डी है।
कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम नहीं
शहर की सफाई व्यवस्था फेल होने का सबसे बड़ा कारण सफाई कर्मचारियों की मनमानी है। कर्मचारियों की सुबह आठ बजे तक कूड़ा उठाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन तमाम कर्मचारी सफाई करने पहुंचते ही नहीं हैं। पालिका अधिकारी उन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।
कहते हैं आंकड़े
25 वार्ड हैं शहर में
41 टन कूड़ा निकलता है रोज शहर में
200 से अधिक सफाईकर्मी हैं पालिका में
01 एक लाख रुपये रोज का खर्च सफाई पर