मैनपुरी। जिले को हराभरा बनाने के लिए वन महोत्सव के तहत 27 लाख पौधे रोपे गए। शहर से लेकर देहात तक पौधरोपण का खूब शोर हुआ, लेकिन 27 दिन भी इन पौधों की रखवाली नहीं की जा सकी। खानापूरी के चलते या तो पौधे सूख चुके हैं या फिर टूट गए हैं, लेकिन इससे किसी को कोई लेनादेना ही नहीं है।
साल दर साल पर्यावरण संरक्षण के लिए लाखों पौधे रोपित किए जा रहे हैं। इसके बाद भी हरियाली नजर नहीं आ रही है। अनदेखी इस कदर हावी है कि पौधे लगाने के बाद आज तक किसी भी विभाग ने इनकी देखभाल नहीं की। उठाई। बीते तीन सालों का आंकड़ा देखें तो जिलें में 78 लाख से अधिक पौधे रोपित किए गए। वन विभाग के बाद ग्राम्य विकास और पंचायत राज विभाग ने सर्वाधिक पौधे रोपित किए। जिले की 552 ग्राम पंचायतों में तीन सालों में 30 लाख से अधिक पौधे रोपे गए। इस वर्ष भी दस लाख से अधिक पौधे गांव-गांव लगाए गए, लेकिन पौधे लगाने के बाद किसी ने भी पलटकर नहीं देखा। परिणाम ये हुआ कि आज तक ये पौधे पनप नहीं पाए। इस बार रोपे गए पौधों का भी हाल कुछ ऐसा ही है।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगे पौधे या तो सूख चुके हैं या फिर टूट चुके हैं। किशनी के गांव डांडेहार में पांच जुलाई को आठ हजार से अधिक पौधे रोपित किए गए थे। इनमें अब बमुश्किल एक हजार पौधे ही बचे हैं। देखरेख न हुई तो वह भी जल्द ही सूख जाएंगे। ये अनदेखी केवल डांडेहार में नहीं, बल्कि जिले की सभी 552 ग्राम पंचायतों में है।
आबकारी मंत्री और मंडलायुक्त का पौधा भी सूखा
वन महोत्सव के तहत रोपे गए पौधों में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के पौधे भी अब नहीं बचे हैं। भोगांव रोड पर सेंट थॉमस स्कूल के सामने आबकारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री और मंडलायुक्त आगरा अनिल कुमार ने पौधे रोपित किए थे। उनके द्वारा रोपे गए पौधे अब टूटी सूखी लकड़ी से ज्यादा कुछ नहीं है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों द्वारा रोपे गए पौधों का भी यही हाल है।
वन विभाग को भी लाखों का नुकसान
हर साल वन विभाग वन महोत्सव के तहत पौधे रोपने के लिए उन्हें तैयार करता है। खुद जो पौधे वन विभाग रोपता है उसके अलावा अन्य विभागों को भी पौधे रोपने के लिए दिए जाते हैं। इसके लिए कोई धनराशि नहीं ली जाती है। जबकि वन विभाग द्वारा एक पौधा तैयार करने में सात रुपये का खर्च आता है। ऐसे में इन पौधों पर वन विभाग हर साल लाखों रुपये खर्च करता है, इसके बाद ग्राम पंचायतें पौधरोपण के बाद ध्यान नहीं देती हैं।
हाईलाइट्र्स
-27.63 लाख पौधों का वर्ष 2020-21 में हुआ रोपण।
-10.38 लाख वन विभाग ने रोपे पौधे ।
-10 लाख ग्राम्य विकास और पंचायत राज विभाग ने गांव में लगाए पौधे।
-23.55 लाख पौधों का वर्ष 2019-20 में हुआ रोपण ।
-27.63 लाख पौधों का वर्ष 2018-19 में हुआ रोपण ।
-07 रुपये आता है एक पौधे पर वन विभाग का खर्च ।
अखिलेश पांडेय, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी एवं वन प्रभाग।
सवाल: वन महोत्सव के तहत जिलेभर में लगाए गए पौधे सूख रहे हैं, जिम्मेदारी किसकी है।
जवाब: अलग-अलग विभागों ने पौधे रोपे हैं, देखरेख की जिम्मेदारी भी उन्हीं विभाग की है।
सवाल: पौधे सूखने पर वन विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जवाब: वन विभाग द्वारा रोपे गए पौधे के लिए वन विभाग की जिम्मेदारी है।
सवाल: अधिकांश पौधे सूख चुके हैं, ऐसे में उद्देश्य कैसे पूरा होगा।
जवाब: वन विभाग द्वारा रोपे गए पौधों की देखरेख के साथ ही पौधा सूखने पर उसे बदला जाता है। संबंधित विभागों से इस बात की जाएगी।