एटा। जिले में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना फाइलों में कैद है। लाखों रुपये बजट होने के बाद भी जिले में दो वर्ष से जागरूकता के लिए कोई काम नहीं हुआ है। वर्ष 2017-18 में जागरूकता के नाम पर प्रोबेशन विभाग को 25 लाख रुपये मिले थे, लेकिन यह धनराशि दो साल में विभाग ने खर्च नहीं कर पाई है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत करने का प्रधानमंत्री का प्रमुख लक्ष्य था कि बेटियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न किया जाए। उनके जन्म को एक उत्सव की तरह मनाया जाए। इसके साथ ही उन्हें शिक्षा ग्रहण करने तक सक्षम बनाया जाए। जिससे वह अपना भरण पोषण स्वंम कर सकें। इसके लिए शासन ने जिले में 2017- 18 में योजना को चलाने के लिए 25 लाख रुपये शासन द्वारा प्रोबेशन विभाग को दिए गए थे, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते यह योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई। बीते दो वर्ष से जिले में जागरूकता के लिए कोई कार्यक्रम नहीं हुए हैं।
दो साल में एक बार हुआ कार्यक्रम
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण योजना है। वर्ष 2015 में लड़का लड़की का भेदभाव मिटाने के लिए यह योजना शुरू की गई थी, लेकिन जिले में बीते दो वर्ष में 2018 में नुमाइस में जागरूकता के लिए एक कार्यक्रम कराया गया था। इसके बाद सीएम ने जिले का दौरा किया था। उस समय कुछ बेटियों को सम्मानित कराया गया था। इसके बाद से इस योजना के तहत जिले में जागरूकता के लिए कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है।
योजना के तहत विभाग के काम
- बेटी के जन्म के समय मिठाई बांटना
- घर व अस्पताल में ढोल लंगाड़े बजाना
- प्रचार प्रसार में समाज में फैली नफरत को मिटाना
- बेटी के खाते में पांच से दस हजार रुपये तक डालना
- समय- समय पर बेटी का स्वास्थ्य परीक्षण कराना