एटा। जिले की ग्राम पंचायतों के अभिलेखों के साथ अभिलेखागार के आदेश गायब हो गए हैं। आलम यह है कि जिले की तमाम ग्राम पंचायतों में अभिलेख नहीं हैं, तो अभिलेखों के रखरखाव को आए अभिलेखागार के निर्देशों की धज्जियां उड़ा दी गईं। तीन साल पहले प्राथमिकता पर होने वाले काम को क्षेत्र पंचायतों ने नकार दिया। जबकि खुशामदी के लिए अन्य निर्माण करा दिए। इसका परिणाम सामने आया कि ग्राम पंचायतों के अभिलेखों में खेल होता रहा और उनको गायब कर दिया गया। हाल ही में ग्राम पंचायतों की जांच में अभिलेख नहीं होने की बात सामने आई, तो पता चला कि अभिलेखागार के निर्देश अब भी ताक पर हैं।
दरअसल 19 जून 2015 को जिला पंचायत राज विभाग के निदेशक ने जिलाधिकारियों को सभी क्षेत्र पंचायतों में अभिलेखागार बनवाने के निर्देश दिए थे। इन अभिलेखागार का खर्च क्षेत्र पंचायतों को मिलने वाली चतुर्थ राज्य वित्त से किया जाना था। साथ ही निर्देश थे कि अभिलेखागार के निर्माण के बाद ही क्षेत्र पंचायतें अन्य कोई काम करा सकेंगी। लेकिन आज तक निर्देश अमल में नहीं आ सके। परिणाम यह रहा कि ग्राम पंचायतों के अभिलेख ग्राम प्रधान और सचिव के हवाले रहे। इसमें मनमाने तरीके से खेल किया जाता रहा। दो साल पहले मुख्यमंत्री योगी ने ग्राम पंचायतों का आडिट कराने पर जोर दिया, तो सामने आया कि जिले की 576 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश में अभिलेख ही नहीं हैं। अभिलेखागार नहीं बनने से अभिलेखों में विकास को आई धनराशि का खेल होता रहा। अब जब जांच में अभिलेख नहीं मिले हैं, तो शासन ने इस पर सवाल उठा दिया है। शासन ने ग्राम पंचायतों के अभिलेख नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई है। जिले के अधिकारियों से क्षेत्र पंचायत कार्यालय पर अभिलेखागार नहीं बनने पर भी सवाल उठाए हैं।
कार्ययोजना में बनते रहे अभिलेखागार
शासन से मिले निर्देशों के बाद क्षेत्र पंचायत की कार्ययोजना में अभिलेखागार बनाने के लिए योजना शामिल की जाती रही। वर्ष 2017-18 में अवागढ़ में 50 लाख, निधौलीकलां ने 50 हजार, सकीट ने 15 लाख और शीतलपुर ने छह लाख रुपये अभिलेखागार बनवाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन कागजों में ही अभिलेखागार बना दिए गए। किसी भी क्षेत्र पंचायत ने प्राथमिकता से इस काम को नहीं कराया और धन का बंदरबांट कर लिया।
सोते रहे जिले के बड़े अधिकारी
जिले के बड़े अधिकारी ने ग्राम पंचायतों के अभिलेखों की हकीकत पर मौन साध लिया है। अभिलेखागार बनवाने और अभिलेखों के गायब होने पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और न ही कोई संज्ञान लिया है।
क्षेत्र पंचायतों को प्राथमिकता से अभिलेखागार बनवाने के निर्देश दिए गए थे। मगर यहां अब तक नहीं बने हैं। ग्राम पंचायतों में जांच के दौरान अभिलेख नहीं मिलते हैं। इसे लेकर सख्त कदम उठाया जाएगा।
मदन वर्मा, सीडीओ एटा
कहते हैं आंकड़े
576 ग्राम पंचायतें हैं जिले में
08 क्षेत्र पंचायतें हैं जिले में
100 से अधिक ग्राम पंचायतों की चल रही जांच
2015 में आए थे अभिलेखागार बनने के निर्देशे