मैनपुरी। राजा के ताल पर अब विदेशी पक्षियों का बसेरा नहीं होता। यहां वर्ष भर आने वाले पक्षियों को शिकारियों की नजर लग गई है। अभी भी शिकारी संरक्षित प्रजाति तीतर का बेखौफ शिकार करते हैं। कई बार स्थानीय लोगों द्वारा शिकायत भी की गई, लेकिन आज तक कोई सुनवाई व कार्रवाई नहीं हो सकी।
करीब एक दशक पूर्व शहर स्थित राजा के ताल पर मानसून की आहट से पहले ही विदेशी पक्षियों का आना शुरू हो जाता था। तरह तरह के चिड़ियां व अन्य पक्षी नजर आते थे। राजा का ताल एक तरह का पर्यटन स्थल बन चुका था। जिले भर से लोग पक्षियों के प्रवास का मनमोहक नजारा देखने के लिए यहां आते थे। प्रशासन भी इस ओर ध्यान देने लगा था, लेकिन इस बीच राजा के ताल को शिकारियों की नजर लग गई। यहां आने वाले विदेशी पक्षियों का शिकार किया जाने लगा।
कई बार पक्षियों को जहर देकर मारने की घटनाएं भी हुईं। इसकी शिकायत स्थानीय लोगों ने कई बार की, लेकिन कोई सुनवाई न होने के चलते शिकारी हावी होते गए और धीरे धीरे विदेशी पक्षियों का आना तकरीबन खत्म हो गया। अराजक तत्वों के पास जब शिकार की कमी हुई तो संरक्षित तीतर प्रजाति का शिकार होने लगा। बता दें कि राजा के ताल क्षेत्र में तीतर काफी पाए जाते थे। शिकार के चलते अब यह भी खात्मे के कगार पर पहुंच गए हैं। स्थानीय लोग भी शिकायतें करते-करते अब थक कर बैठ चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजा के ताल को शिकारियों के साथ ही भू-माफियाओं की नजर भी लगी है। ताल पर दबंग कब्जा जमा रहे हैं। हाल ही में लेखपाल की ओर से एसडीएम को दी गई एक जांच रिपोर्ट में महमूद नगर निवासी सलीम खान पर अवैध कब्जे के आरोप सही पाए थे। मिट्टी डालने की कोई परमीशन न होने की बात भी जांच रिपोर्ट में कही गई थी। इस पर मामला दर्ज किए जाने की संस्तुति भी की गई थी। हालांकि अभी तक भू-माफिया के विरुद्ध मामला दर्ज नहीं किया गया।