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अध्यक्ष की कुर्सी से लगा ‘कैरियर पर बैरियर’

Sat, 14 Nov 2015 02:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
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 जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव के बाद अध्यक्ष पद की कुर्सी पाने को महाभारत शुरू हो गई है। बसपा, भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर है, लेकिन इसे महज संयोग कहें या कुर्सी का असर कि जो भी इस कुर्सी पर बैठा, उसका राजनीतिक सफर यहीं तक सिमट कर रह गया।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में बसपा सबसे आगे है। पार्टी के नेता जरूरी बहुमत जुटाने का दावा कर रहे हैं। भाजपा की ओर से फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल के पुत्र राकेश चौधरी जोर आजमाइश में लगे हैं। सत्ताधारी सपा से कई प्रत्याशी दौड़ में हैं। एक ओर कांटे की टक्कर है तो दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर जो भी बैठा उसका राजनीति सफर फिर आगे नहीं बढ़ सका। जानकार बताते हैं कि पिछले पांच जिला पंचायत अध्यक्षों के सफर पर नजर डालें तो वे तमाम कोशिशों के बावजूद आगे नहीं बढ़ सके। ठाकुर चंदन सिंह का जिले की राजनीति में बड़ा दबदबा था। अध्यक्ष बने और कैरियर पर बैरियर लग गया। प्रेम कुमारी परमार ने पद संभाला और उसके बाद उनका सफर थम गया। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन की पत्नी कलावती सुमन बड़ी जद्दोजहद के बीच चुनाव जीतीं और इस कुर्सी पर पहुंचने के बाद उनकी राजनीतिक यात्रा भी थम गई। बसपा की सरकार आई तो खेरागढ़ के विधायक भगवान सिंह ने अपने पिता दौलतराम कुशवाह को इस कुर्सी तक पहुंचाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। सफलता मिली लेकिन यह कुर्सी कांटों भरी साबित हुई। प्रदेश का निजाम बदला तो जिले की पंचायत से दौलतराम को हाथ धोना पड़ा। समाजवादी सरकार आई तो गणेश यादव को सिंहासन पर बैठा दिया। पूरा कार्यकाल विवादों से भरा रहा। उम्मीद थी कि फिर से सदस्य का चुनाव जीतें और दोबारा कुर्सी हथिया लेंगे लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि सदस्य पद भी नहीं बचा पाए। आगे भविष्य क्या होगा कोई नहीं कह सकता है। कार्यवाहक जिलाध्यक्ष रहे लालसिंह भी कुर्सी के शाप नहीं बच पाए।
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इनके लिए कांटों भरी साबित हुई कुर्सी
चंदन सिंह
प्रेम कुमारी परमार
प्रेमवती सुमन
दौलतराम कुशवाह
गणेश यादव
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सपा के दावेदारों के अरमान हुए ठंडे
आगरा। समाजवादी पार्टी में दावेदारों की लंबी लाइन थी। सत्ताधारी पार्टी होने के चलते हर कोई ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की फिराक में था लेकिन अब पार्टी आलाकमान ने फरमान सुना दिया है कि प्रत्याशी नेतृत्व तय करेगा। तब से कई लोगों के अरमान ठंडे हो गए हैं।
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