शराब बंदी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे 96 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन को पुलिस ने घर से नहीं निकलने दिया। गुरुवार शाम से प्रशासन ने उन्हें नजरबंद कर दिया है। तीन सिपाही और एक सब इंस्पेक्टर उनके घर में बैठे रहे। उन्होंने शाम पांच बजे गांधी स्मारक जाने की इच्छा जताई थी लेकिन पुलिस अधिकारियों ने इजाजत नहीं दी। यमुना में जल समाधि लेने का प्रण पूरा न होने से आहत चिम्मन लाल जैन ने एलान किया है कि वे गांधीजी के बलिदान दिवस (30 जनवरी) को शराब की दुकानों में आग लगाएंगे।
बता दें, गांधीवादी चिम्मन लाल जैन शराब बंदी की मांग को लेकर पिछले चार माह से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने एलान किया था कि सरकार ने शराब बंदी नहीं की तो वे गांधी जयंती पर यमुना के स्ट्रेची ब्रिज से कूद जल समाधि ले लेंगे। उनके इस आंदोलन को शहरवासियों का समर्थन मिलने लगा था। दो अक्तूबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी एक सुर, एक ताल कार्यक्रम का उद्घाटन आ रहे थे। इससे प्रशासन में हड़कंप मच गया था। चिम्मन लाल जैन कहीं आत्महत्या न कर लें, इस डर से पुलिस ने उन्हें गुरुवार शाम को ही उनके घर में नजरबंद कर दिया था। सुबह उनके घर पर सुरक्षा और बढ़ा दी गई थी। तीन सिपाही और एक सब इंस्पेक्टर तैनात था।
अपनी प्रतिज्ञा पूरी न होने से आहत चिम्मन लाल जैन ने कहा कि ‘बड़े अफसोस की बात है कि हमने देश को आजादी दिलाने के लिए अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी और अब इस आजाद देश में हमें नजरबंद किया जा रहा है। मेरा हौसला नहीं मरा है, शराब बंदी का यह आंदोलन और जोर पकड़ेगा। तमाम संस्थाओं ने हमें समर्थन दिया है। आंदोलन प्रदेशव्यापी बनेगा।’ यह कहते हुए उनकी मुट्ठियां भिंच गईं और कहा कि ‘मैं एलान करता हूं कि गांधीजी के बलिदान दिवस पर मैं स्वयं शराब की दुकानों में आग लगाऊंगा।’
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सरकारी नुमाइंदे मनाने तक नहीं पहुंचे
बेलनगंज पथवारी स्थित अपने आवास में नजरबंद किए गए चिम्मन लाल जैन से मिलने कांग्रेसी नेता पहुंचते रहे। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा, शहर अध्यक्ष अबरार हुसैन, राम टंडन, केपी सिंह, राजीव गुप्ता आदि ने विरोध जताते हुआ कहा कि एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को यह कैसे दिन देखने पड़ रहे हैं। महात्मा गांधी की इच्छा के अनुसार मद्य निषेध की मांग करने पर उन्हें नजरबंद किया जा रहा है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि प्रदेश सरकार का कोई नुमाइंदा उन्हें मनाने तक नहीं पहुंचा। जिला प्रशासन ने भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सम्मान नहीं रखा।
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96 के बुजुर्ग या 96 वर्ष के जवान
96 वर्ष की उम्र में भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन के जोश में कोई कमी नहीं है। पिछले चार माह से आंदोलन चला रहे हैं। घुटने कमजोर हो गए हैं चलने में असमर्थ हैं, लेकिन जागरूकता रैलियों में खूब भाग लेते हैं। शुक्रवार को जब कांग्रेसियों ने चरखे का जिक्र छेड़ा तो झट से चरखा चलाने को तैयार हो गए। उनका मुख्य चरखा तो ताज म्यूजियम में सुरक्षित रखवा दिया गया, लेकिन उन्होंने एक और चरखा बनाया है, जिसे लेकर झट से सूत कातने को तैयार हो गए।