मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मिड डे मील में बुधवार को 200 मिलीग्राम दूध और कोफ्ता देने का आदेश तो दे दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि 3.59 रुपये में दोनों चीज कहां मिलती है? रही सही कसर शिक्षकों के लालच ने पूरी कर दी। एक लीटर पर दस रुपये बचाने के चक्कर में 139 बच्चों की जिंदगी खतरे में डाल दी। इसके बाद बीमार बच्चों को उपचार भी ठीक से नहीं मिला। एक तो एंबुलेंस देर से आई। दूसरा सीएचसी में व्यवस्थाएं नहीं थीं।
मतलब यह है कि मिड डे मील का पूरा सिस्टम ही बीमार था, जिससे बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में भर्ती कई बच्चे कह रहे हैं कि स्कूल में अब कभी दूध को छुएंगे भी नहीं। बीमार बच्चों के उपचार का बंदोबस्त भी ठीक नहीं था।
खून की उल्टी आने पर बच्चे रेफर तो कर दिए गए, लेकिन उन्हें ले जाने का इंतजाम नहीं था। अभिभावक बच्चों को गोदी में लेकर अस्पताल में आ गए लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। प्रशासन के अधिकारी यह सब देख रहे थे लेकिन कर कुछ नहीं पा रहे थे।
लापरवाही पुलिस की भी रही जो ब्रजेश नाम के दूधिए को भागने का मौका दे दिया। उसी ने 30 रुपये लीटर की दर से स्कूल में दूध सप्लाई किया था। इससे पहले किसी अन्य दूधिए से 40 रुपये लीटर की दर से दूध लिया जा रहा था। जांच इस बात की भी हो रही है कि इसके लिए अनुमति किससे ली गई? और क्या बचा हुआ पैसा शिक्षक अपनी जेब में रखना चाहते थे।
आशंका - 1 : दूध सिंथेटिक
जिस तरह दूध पीते ही बच्चे उल्टी करने लगे और कई को खून की उल्टियां हुई, उससे माना जा रहा है कि दूध केमिकल से तैयार किया गया था, जिसने बच्चों के पेट में जाते ही रिएक्शन किया। एफडीए का कहना है कि तीन दिन में सैंपल की जांच रिपोर्ट आ जाएगी।
आशंका -2 : गंदे पानी की मिलावट
ग्रामीणों ने बताया है कि ब्रजेश दूध में पानी की मिलावट करता है। कई बार दूध के डब्बे में तालाब से पानी भर लेता है। इसी में दूध डाल लेता है। आशंका यह भी है कि दूध में गंदे पानी की मिलावट की गई। हालांकि सही वजह जांच रिपोर्ट आने पर साफ होगी।
घटना से केंद्रीय राज्यमंत्री दुखी
आगरा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया ने ऊंटगिरि की घटना को दुखद बताते हुए पार्टी पदाधिकारियों से बच्चों की पूरी मदद करने और इलाज के निर्देश दिए हैं।
नौनिहालों की जान से खिलवाड़ कर रही सरकार
आगरा। ऊंटगिरि की घटना से यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ आहत है। संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर बच्चों का हाल जाना। कहा कि 3.59 रुपये में 200 मिली दूध के साथ लौकी के कोफ्ते आखिर कैसे दिए जा सकते हैं। इतनी कम धनराशि में शुद्ध पानी भी नहीं मिल पाता। शिक्षक संघ के बृजेश दीक्षित, यादवेंद्र शर्मा, दिनेश चाहर, राजीव रावत, वीरेन्द्र चाहर, राकेश त्यागी, चेतन शर्मा, राजेश पांडेय, सुनील धनगर आदि ने घटना पर दुख जताया। वहीं यूटा प्रदेश संयोजक शिवराज सिंह ने दूध वितरण के तानाशाही फरमान को नौनिहालों की जान से खिलवाड़ बताया है। उन्होंने कहा कि यूटा ने दूध की जगह केला और बिस्किट देने का प्रस्ताव भेजा था।
शिक्षकों पर कार्रवाई होगी
बच्चों की हालात अब ठीक है। अधिकांश को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। मामले में जांच समिति गठित कर दी गई है। इसमें एफडीए, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और एसडीएम को शामिल किया गया है।
- पंकज कुमार, जिलाधिकारी