इधर, कानपुर में शून्य तक गिरने के बाद नए साल के पहले दिन दोपहर को चंद मिनटों के लिए निकली हल्की गुनगुनी धूप से पारा चढ़ गया। वहीं दूसरे दिन यानी दो जनवरी को धूप निकलने से लोगों को ठंड से कुछ राहत मिली। दो जनवरी को अधिकतम तापमान 23.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 7.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने यूपी के कानपुर समेत बांदा, महोबा, चित्रकूट. हरदोई, फतेहपुर, इटावा, कन्नौज, उन्नाव आदि शहरों में अभी दो दिन तक बारिश होने की संभावना जताई है।
सीएसए के मौैसम विभाग के मुताबिक, इस वक्त उत्तरी-पूर्वी हवाएं चल रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर हवा का रुख बदला तो हिमालय की शीत लहरी मैदानी इलाकों में गति पकड़ेगी। इससे पारा माइनस में भी जा सकता है। वर्ष 2003 और 2013 में जनवरी के दूसरे और तीसरे सप्ताह में पारा माइनस में गया था।
ग्लोबल वार्मिंग से अचानक ठंड-बारिश
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अचानक ठंड-बारिश हो जाती है। सीएसए विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के प्रभारी डॉ. नौशाद खान का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग से भू मध्य सागर, काला सागर और कैस्पियन सागर में लो प्रेशर जोन बनता है। इससे अचानक तेज ठंड और तेज बारिश हो सकती है।
पारा अचानक गिरना और गलन वाली ठंड बढ़ना जलवायु परिवर्तन का असर है। विज्ञानियों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन में मौसम आगे-पीछे होता है। अचानक बारिश या ठंड तेज हो जाती है।