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आंख बंद कर किताब पढ़ सकते हैं ये बच्चे, हैरान करने वाले इनके कारनामे

Fri, 19 May 2017 07:54 PM IST
अजय झंवर/ अमर उजाला कासगंज
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मिड ब्रेन एक्टिवेशन - फोटो : अमर उजाला
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आंख बंद करके किताब पढ़ने की बात हो या फिर किसी भी नोट का नंबर और रंग बताने की कला , किसी कार्ड सीट को बस छूते ही उसका रंग बता देना कासगंज के बच्चे कुछ ऐसे ही हैरत भरे कारनामे दिखा रहे हैं। दरअसल ये कोई चमत्कार नहीं है ये एक पद्धति है जिसे मिड ब्रेन एक्टिवेशन कहा जाता है। यह एक ऐसा फॉर्मूला है जिससे दिमाग का तीसरा हिस्सा यानि मिड ब्रेन काम करना शुरू कर देता है। मेडीटेशन और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। 
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किंशुक कक्षा 9 के छात्र हैं अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर भी किताब पढ़ने का हुनर रखते हैं यही नहीं किंशुक के हाथ में बंद किताब देकर उन्हें किताब के अंदर छपी तस्वीर के बारे में बस थोड़ा सा बता दिया जाए तो यह बच्चा किताब के पन्ने पलटकर उस तस्वीर को ढूंढकर सामने रख देता है। ऐसा ही कुछ जिनी बिंदल और पर्व तायल भी कर के दिखाते हैं। जिनी की आंखों पर पट्टी बांधकर उसके हाथ में कोई भी कार्ड थमा दीजिए जिनी पलक झपकते ही इस कार्ड का कलर और उस पर लिखे शब्दों को तुरंत पढ़कर बता देती हैं।  

मिड ब्रेन एक्टिवेशन ऐसा फॉर्मूला जिससे दिमाग का तीसरा हिस्सा अर्थात मिड ब्रेन काम करना शुरू कर देता है। मानव के मस्तिष्क को तीन भागों में बांटा जाता है। पहला भाग राइट ब्रेन, दूसरा लेफ्ट और तीसरा भाग मिडब्रेन होता है सामान्य तौर पर किसी भी मनुष्य के मस्तिष्क के दो ही हिस्से ज्यादा सक्रिय रहते हैं राइट ब्रेन और लेफ्ट ब्रेन जो किसी भी कार्य करने के लिए पर्याप्त हैं लेकिन मिड ब्रेन एक्टिवेशन के जरिए मस्तिष्क का साधारण से ज्यादा उपयोग किया जा सकता है। इस ब्रेन के एक्टिव होने से मनुष्य अपने सेंस को विकसित कर सकता है और किसी भी वस्तु या मनुष्य को आंखें बंदकर उसके स्पर्श से बता सकता है। 
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विज्ञान के पास नहीं इसका प्रमाण

कोमल सेठ - फोटो : अमर उजाला
एक्टीवेशन ट्रेनर कोमल सेठ का कहना है कि ट्रेनिंग के जरिए ब्रेन को एक्टिव किया जाता है। जिससे ब्रेन पावर बढ़ती है। पांच से छ: माह में ट्रेनिंग के बाद बच्चे एडवांस स्थिति में आकर आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ सकते हैं और रंग महसूस कर सकते हैं। वहीं न्यूरोफिजिशियन  डा. पीके माहेश्वरी साइंन्टिफिकली ऐसी कोई चीज प्रूफ नहीं हुई है। ये एक जैपनीज तकनीक है 14 साल तक के बच्चों के लिए ये होता है। इसे फोटोग्राफिक मैमोरी कहते हैं। इसमें कंसन्ट्रेशन पावर का यूज किया जाता है।   
 
 
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