आगरा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डाॅ. डीके पांडेय पर 25 लाख रुपये के गबन का आरोप है। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी को एडीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए हैं। सीवीओ पर लेखाकार की बीमारी का लाभ उठाकर फर्जी बिल जारी करने, बिना डिलीवरी सामान की खरीद-फरोख्त दिखाने और सरकारी धन का बंदरबांट करने की शिकायत डिप्लोमा वेटरनरी एसोसिएशन ने दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार पूर्व कार्यवाहक सीवीओ डॉ. जयंत यादव और सीवीओ डॉ. डीके पांडेय ने गठजोड़ कर सरकारी धन का गबन किया। 17 सितंबर 2024 को कार्यवाहक सीवीओ डॉ. जयंत यादव की जगह डॉ. पांडेय ने सीवीओ का चार्ज संभाला था। आरोप है कि कार्यवाहक सीवीओ ने खंडित डिजिटल हस्ताक्षर सर्टिफिकेट (डीएससी) का प्रयोग कर 25 लाख रुपये की फर्जी खरीद दिखाई, जिसका सीवीओ डॉ. पांडेय ने भुगतान करा दिया।
डिप्लोमा वेटरनरी एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सतीश चंद शर्मा ने बताया कि पशुपालन विभाग में फर्जी बिल से सरकारी धन का बंदरबांट हुआ है, जिसकी शिकायत मंडलायुक्त से की गई। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने डीएम को एडीएम स्तर के अधिकारी और लेखा सेवा के अधिकारी की संयुक्त कमेटी बनाकर आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। इस संबंध में सीवीओ डॉ. डीके पांडेय का कहना है कि आरोप निराधार हैं। कोई वित्तीय अनियमितता नहीं बरती गई है। जांच में सबकुछ साफ हो जाएगा।
प्रमुख सचिव तक पहुंचा मामला
वित्तीय अनियमितताओं में सीवीओ डॉ. डीके पांडेय और पूर्व कार्यवाहक सीवीओ डॉ. जयंत यादव के अलावा अपर निदेशक पशुपालन डॉ. देवेद्र पाल सिंह के खिलाफ भाजपा एमएलसी विजय शिवहरे ने प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम को शिकायत भेजी है। आरोपों की उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच कराने की मांग की गई है।