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गजब का खेल: जो पहले से थे शादीशुदा, उनकी कराई गई शादी... दंपती 51 हजार रुपये लिए फिर से बने दूल्हा-दुल्हन

Mon, 17 Jun 2024 12:34 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

मैनपुरी में दंपती की फिर से शादी कराई गई। दोनों दूल्हा-दुल्हन बने, सात फेरे हुए और उपहार में सामान भी मिला। इतना ही नहीं इस दंपती को इस शादी के लिए 51 हजार रुपये का लाभ मिला। ये शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत कराई गई। 

 
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शादी (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बलिया में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में हुआ फर्जीवाड़ा तो सभी को याद ही होगा। इसमें कई अफसरों और कर्मचारियों पर गाज गिरी थी। बलिया की तरह मैनपुरी में भी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। शादीशुदा जोड़े के सामूहिक विवाह में फिर से फेरे करा दिए गए।
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मामला विकास खंड घिरोर के गांव नाहिली का है। गांव निवासी विजय पाल पुत्री सेजल की शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने आवेदन भी किया था। समारोह में देरी के चलते उन्होंने 17 जनवरी 2023 को रीति-रिवाज से गांव में ही बेटी की शादी देशराज के साथ कर दी थी।
 

इसके बाद 28 जनवरी 2023 को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें भी समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से शादीशुदा जोड़े को फिर से फेरे दिला दिए गए। विजय पाल ने बताया कि इसके लिए एडीओ समाज कल्याण ने उनसे 5000 रुपये की धनराशि रिश्वत के रूप में ली थी। 800 रुपये पहले लिए गए और 4200 रुपये बाद में लिए गए। रुपये लेने के बाद ही एडीओ समाज कल्याण ने अपात्र होने के बाद भी सेजल को पात्र दर्शा दिया और समारोह में उसकी दोबारा शादी करा दी। विजयपाल ने बताया कि उनका इरादा फर्जीवाड़ा करने का नहीं था।

 

मामला खुलने के बाद समाज कल्याण विभाग पूरे मामले को दबाने में जुटा हुआ है। मामले में जब एडीओ समाज कल्याण घिरोर राजकमल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह बाहर हैं, ऑफिस आकर ही कोई जानकारी दे सकेंगे। इसके बाद उन्होंने बात करने से इन्कार कर दिया।
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51 हजार रुपये प्रति जोड़े पर खर्च करती है सरकार
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक जोड़े पर कुल 51 हजार रुपये की धनराशि खर्च की जाती है। इसमें 35 हजार रुपये की धनराशि सीधे बेटी के खाते में जमा कराई जाती है। 10 हजार रुपये का सामान भेंट स्वरूप दिया जाता है। वहीं बाकी बचे 6 हजार रुपये की धनराशि आयोजन पर खर्च की जाती है। जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर कहीं ऐसी गड़बड़ी हुई है तो जांच करवाकर दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकारी योजना में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
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