सूर्य उपासना का महापर्व छठ बुधवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। घरों में छठ मैया के गीत ‘छठ मइया के दिहल ललनवा, अंगनवा डोले...’व ‘कोपी-कोपी बोलेली ये छठि माई...’ आदि गूंजने लगे हैं। इस वर्ष यमुना के घाटों के बजाय घरों और कॉलोनी में ही अस्ताचलगामी और उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य की तैयारी चल रही है।
छठ पर्व के पहले दिन तन और मन के शुद्धीकरण का विधान किया गया। घर में साफ-सफाई की गई। व्रत रहने वालों ने लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाकर खाया। इसी के साथ षष्ठी पूजन की तैयारी शुरू कर दी गई। पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के अध्यक्ष शंभूनाथ चौबे ने बताया कि नहाय खाय के दिन सुपाच्य भोजन किया जाता है। इसके पीछे उद्देश्य शरीर को हल्का रखना होता है।
संतान की रक्षा के लिए रखते है व्रत
छठ पूजा बहुत ही पवित्र पर्व है। यह आरोग्यदाता, दीर्घायु के साथ संतान प्रदाता है। संतान की रक्षा के लिए इस व्रत को किया जाता है। - अनुराधा तिवारी दुबे, नामनेर
- छठ मैया का व्रत रोगों से मुक्ति पाने और संतान की सुख समृद्धि के लिए रखा जाता है। सच्चे मन से व्रत रखने से मनोकामना पूरी होती है। - चुनमुन मिश्रा, शास्त्रीपुरम
- छठ पर्व का वर्ष भर इंतजार रहता है। छठ मैया का व्रत रखकर मन को शांति मिलती है। कठिन व्रत भी आसान लगता है। - सरोज पाठक, लोहामंडी