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धूमधाम से मनाई चेतन्य महाप्रभु की जयंती

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मथुरा। चेतन्य महाप्रभु की जयंती के अवसर पर चंद्रोदय मंदिर में ठाकुर जी का अभिषेक करते पुजारी। - फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। चेतन्य महाप्रभु की जयंती पर धूमधाम से मंदिरों तथा आश्रमों में आयोजन हुए। इस दौरान इस्कॉन तथा चंद्रोदय मंदिर में भी कार्यक्रम हुआ। स्वामी भक्ति वेदांत मार्ग स्थित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में गौरपूर्णिमा महामहोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
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शुभारंभ प्रात:कालीन बेला की मंगला आरती के साथ हुआ। इस क्रम में ठाकुर श्रीश्री राधा वृंदावन चंद्र को नवीन पोशाक धारण कराई। मंदिर प्रांगण में ही गौरांग एवं नित्यानंद महाप्रभु के पालकी उत्सव का आयोजन किया गया। उसके पश्चात उत्सव विग्रह को अभिषेक के लिए ले जाया गया। जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच महाभिषेक हुआ। चैतन्य एवं नित्यानंद महाप्रभु का अभिषेक 108 प्रकार के दिव्य पदार्थों से किया गया।
वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में आयोजित चैतन्य महाप्रभु के आविर्भाव उत्सव के दौरान वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष चंचला पति दास ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि परम विजयते श्रीकृष्ण संकीर्तन गौरयचैतन्य पूर्णिमा का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु के गौर वर्ण होने के कारण उन्हें गौरांग नाम से संबोधित किया जाता रहा है। हम सबको महाप्रभु द्वारा प्रदत्त सिद्धांतों को जीवन में उतारने का प्रयत्न करना चाहिए।
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राज्यमंत्री नगर विकास महेश गुप्ता, प्रांत समस्ता प्रमुख राज किशोर, अक्षय पात्र फाउंडेशन के निदेशक भरतर्षभा दास, वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के उपाध्यक्ष केवल्यपति दास सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस्कॉन में भी चेतन्य महाप्रभु की जयंती पर चेतन्य महाप्रभु का अभिषेक किया। विग्रह की आरती उतारी गई। इस दौरान अध्यक्ष पंचगौड़ा दास, वैष्णव दास, महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, सौरभ दास, श्रीराम पंडित, निरंजन प्रभु, देव व्रत दास, नीलमाधव दास मौजूद थे। स्वामी अखंडानंद आश्रम में चेतन्य महाप्रभु की जयंती मनाई गई। विद्वत गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जगतगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि वह दिव्य नादिया धाम में बचपन से ही श्रीकृष्ण का नाम सुनते ही नृत्य करने लगते थे। जगद्गुरु मन्माधव गौड़ेश्वर संप्रदायाचार्य राधाबल्लभ दास देवाचार्य, महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद दास, नेत्रपाल शर्मा, डॉ. गोविंदानंद आदि मौजूद थे।
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