आगरा। फास्ट फूड-डिब्बा बंद भोजन की लत से किशोरियों के हार्मोंस गड़बड़ा रहे हैं। 18-20 की उम्र में रसौली की भी दिक्कत बन रही है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में आगरा आब्सट्रेटिकल एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी की ओर से आयोजित एंडो रोबो गायनी-2025 कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलाजी एंडोस्कोपिस्ट के सचिव गुजरात के डॉ. सुजल मुंशी ने बताया कि देर से शादी, तनाव, मोटापा और डिब्बा बंद भोजन के उपयोग से 20-25 फीसदी महिलाओं के गर्भाशय की थैली में गांठ (रसौली) बन रही है। इनमें से 3-5 फीसदी में सर्जरी करनी पड़ती है। 18-20 की उम्र में भी ये समस्या मिल रही है। फास्टफूड-डिब्बा बंद भोजन में उपयोग किए जाने वाले रसायनों के कारण रसौली बन रही है।
दरअसल, इन रसायनों से हार्मोंस भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे माहवारी का चक्र बिगड़ रहा है। हल्के बाल उगने समेत अन्य दिक्कतें भी हैं। पौष्टिक भोजन, व्यायाम से इन परेशानियों से बचा जा सकता है। कोषाध्यक्ष डॉ. सेजल नाइक ने बताया कि बढ़ती उम्र, देर से शादी, कई बार गर्भधारण करना, कब्ज होने के कारण पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे खांसने, हंसते वक्त यूरिन लीक की परेशानी बन जाती है। झिझके बिना डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई बार व्यायाम करने, पौष्टिक आहार से भी ये ठीक हो जाती है।
तकनीक का कमाल, टेली रोबोटिक सर्जरी बनी वरदान
कार्यशाला के उदघाटन पर पदमश्री डॉ. ऊषा शर्मा ने कहा कि टेली रोबोटिक सर्जरी क्रांतिकारी साबित हो रही है। इसमें एक स्थान पर बैठकर चिकित्सक किसी भी दूसरे शहर के अस्पताल में भर्ती मरीज की सर्जरी कर सकते हैं। कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. अमित टंडन ने बताया कि कार्यशाला में इस तकनीक से कैंसर, पेट, आंत समेत अन्य बीमारियों के ऑपरेशन हो रहे हैं। चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया है। इसमें रोबोटिक सर्जरी का सेटअप दोनों अस्पतालों में होना जरूरी है। पहली बार कार्यशाला में इस तकनीक से मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत कई प्रदेशों के मरीजों की सर्जरी की गई है। उद्घाटन में डॉ. सुधीर रावल, डॉ नूतन जैन, डॉ. कमलेश टंडन, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. निधि बंसल, डॉ. नीहारिका मल्होत्रा, डॉ. वैशाली टंडन आदि मौजूद रहे।