आगरा। शाहगंज थाने के एक मामले में विवेचक रेखा रानी ने आरोपी को भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा-35 (3) का नोटिस नहीं दिया। चार्जशीट लगा दी। लोहामंडी एसीपी गौरव सिंह ने भी पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती। उनके कार्यालय से चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अचल प्रताप सिंह ने दोनों के स्पष्टीकरण को निरस्त कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
थाना शाहगंज में आरोपी उदयराज के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, अपमानित करने, गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचक रेखा रानी ने आरोपी उदयराज सिंह को धारा 35 (3) बीएनएसएस का नोटिस नहीं दिया। विवेचना में दुष्कर्म की धारा हटा दी। इसके बाद अपमानित करने और गंभीर चोट पहुंचाने की धारा में चार्जशीट लगा दी।
एसीपी लोहामंडी कार्यालय से भी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई। कोर्ट ने पत्रावली पर संज्ञान लिया तो लापरवाही के बारे में पता चला। कोर्ट ने केस की विवेचक रेखा रानी को नोटिस भेजा। उन्होंने कोर्ट में स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। उसमें लिखा कि कार्य की अधिकता व व्यस्तता के कारण नोटिस अभियोग दैनिकी में संलग्न करने से रह गया।
नोटिस निरस्त करने की मांग की गई। कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि विवेचक की ओर से आरोपी को नोटिस तालीम कराया जाता तो जीडी या सीडी में उल्लेख होता है। इसके बाद एसीपी लोहामंडी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के आदेश दिए। वह भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए।
उन्होंने भी स्पष्टीकरण में लिखा कि विवेचना अधिकारी ने अल्प अवधि में आरोपपत्र कार्यालय में उपलब्ध कराया। समय के अभाव में सही से पर्यवेक्षण नहीं हो सका। जिस वजह से गलती हुई। कोर्ट ने इसे घोर लापरवाही का मानते हुए आदेश में लिखा कि एसीपी ने बिना पर्यवेक्षण किए आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया। यह कृत्य अक्षम्य प्रकृति का है।