आगरा। जिला पंचायत क्षेत्र में मिल, कारखाने, फैक्टरी पर एक हजार से लेकर एक लाख रुपये तक व्यावसायिक लाइसेंस शुल्क लागू करने का विरोध जारी है। बुधवार को नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ने मुख्यमंत्री, पंचायतीराज मंत्री और जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र लिख शुल्क वापसी की मांग उठाई है।
चैंबर अध्यक्ष संजय गोयल ने बताया कि टीटीजेड में पहले से ही कई प्रतिबंध लगे हैं। उद्योग धंधे नहीं पनप पा रहे। ऐसे में व्यावसायिक शुल्क लगाना अनुचित है। उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत व्यावसायिक लाइसेंस शुल्क लागू करने जा रहा है। 16 जनवरी को बोर्ड की बैठक में शुल्क का प्रस्ताव रखा जाएगा। वर्ष 1997 से शुल्क में कोई संशोधन नहीं हुआ। उस समय अधिकांश दुकानों पर शुल्क लगता था।
नए मॉडल बायलॉज में सभी तरह के व्यवसाय शुल्क के दायरे में आ गए हैं। सबसे ज्यादा मार सूक्ष्म, लघु, मध्यम और भारी उद्योगों पर पड़ेगी। भारी उद्योग पर एक लाख रुपये तक लाइसेंस शुल्क का प्रावधान है।