बाह/पिनाहट। चंबल नदी में रविवार रात जलस्तर 121 मीटर पहुंचने के बाद अब पानी की रफ्तार धीमी होने लगी है। मंगलवार दोपहर तक जलस्तर दो मीटर घटकर 119 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि नदी में खतरा अभी भी बरकरार है। चंबल किनारे बसे गांवों में प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
सहायक नदियों का भारी मात्रा में पानी आने से पिछले तीन दिनों से चंबल नदी उफान पर है। पिनाहट ब्लॉक क्षेत्र के गांव रेहा, पुरा डाल, क्योरीपुरा, मऊ की मढैया, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा गांव के कच्चे रास्ते एवं खादरों में चंबल के उफान का पानी भर गया था। इससे बाजरा की फसल जलमग्न हो गई थी। रेहा के प्रधान अजय कौशिक, सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह, भगवानपुरा के प्रधान बच्छराज सिंह, मऊ के प्रधान उदयभान सिंह ने बताया कि चंबल उतरने से बाढ़ के अंदेशे को लेकर परेशान 38 गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। तराई के कछार के खेतों में पानी भरने से बाजरा, तिल और सब्जियों की फसलों में नुकसान हुआ है। नदी अपने किनारे एवं खादरों में कीचड़ और दलदल छोड़ गई है। हालांकि पिनाहट घाट स्थित शिव मंदिर अभी भी नदी के पानी में डूबा हुआ है। चंबल के तेज बहाव में नदी का किनारा पकड़ने वाले घड़ियाल और मगरमच्छ के खादरों में फंसे होने के अंदेशे में वन विभाग ने पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया ग्रामीणों को भी गांव या खादर में मगरमच्छ एवं घड़ियाल दिखने पर वन विभाग को सूचना देने के लिए लगातार जागरूक किया था।
वर्जन-
राजस्थान की बारिश के चलते चंबल नदी में उफान आया था। जलस्तर लगातार घट रहा है। बाढ़ का कोई खतरा नहीं है फिर भी ग्रामीण नदी क्षेत्र से दूर रहें।- विनोद कुमार, एसडीएम बाह