चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर बना हुआ है। पानी से घिरे गांवों में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। सीएचसी और पशु चिकित्सालय को डाक्टरों की टीम भेजने के निर्देश दिए गए हैं। लोग रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए तरस रहे हैं। बाह के रानीपुरा, भटपुरा, गोहरा के लिए नाव और स्टीमर का संचालन होने से लोगों को राहत मिली है। अन्य गांवों में कोई सुविधा न मिलने से लोग गुस्से में है।
बता दें कि चंबल नदी में राजस्थान के झालावाड़ और कोटा बैराज से छोडे़ गए पानी के चलते बाह पिनाहट क्षेत्र में सोमवार की रात जलस्तर खतरे के निशान 130 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि जलस्तर में थोड़ी कमी आई है। यह 129.60 मीटर पर आ गया है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। चंबल में उफान से बाह के मऊ की मढै़या, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, धांधूपुरा, झरनापुरा, पुरा शिवलाल, पुरा डाल, पिनाहट के उमरैठापुरा, रेहा, बरेंडा, डबरा, कछियारा पानी से घिर गए हैं। इन रोग संक्रमण के खतरे ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई महिलाएं और बच्चे बुखार की चपेट में है। पशु भी बीमार हो रहे हैं।
एसडीएम उमाशंकर और तहसीलदार कुमार संजय मंगलवार को प्रभावित गांव गौहरा, रानीपुरा, भटपुरा तक स्टीमर से पहुंचे और लोगों की समस्याएं सुनीं। प्रधान रामनाथ सिंह ने डबरा, कछियारा, रेहा, बरेण्डा और प्रधान नरसिंह ने झरना पुरा, शिवलाल पुरा, डालपुरा तक पहुंचने के लिए नाव की व्यवस्था न होने पर नाराजगी जताई। एसडीएम ने बताया कि गांव में बीमारों के इलाज के लिए सीएचसी और पशु चिकित्सालय को डाक्टरों की टीम भेजने के निर्देश दिए हैं। राजस्व विभाग की टीम को लगातार नजर रखने की हिदायत दी गई है।
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मगरमच्छ और घड़ियाल का खतरा
बाह। चंबल में उफान के साथ घड़ियाल और मगरमच्छ के राह भटककर गांवों तक पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम ने रेंजर आरके शर्मा से नियमित कांबिंग करने के निर्देश दिए हैं।