चंबल में इंडियन स्कीमर के संरक्षण पर बांबे नेशनल हिस्ट्री सोसाइटी की शोधकर्ता परवीन शेख ने शोध शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि चिड़ियों के लिए चंबल सुरक्षित ठिकाना है। बता दें कि पिछले साल इंडियन स्कीमर के संरक्षण के लिए यूपी बर्ड फेस्टिवल और वाइल्ड लाइफ ने फंड देने की घोषणा की थी। चंबल में इंडियन स्कीमर की नेस्टिंग से लेकर ब्रीडिंग तक हो रही है। बांबे नेशनल हिस्ट्री सोसाइटी को इसका काम दिया गया है।
परवीन शेख ने बताया कि इंडियन स्कीमर के लिए चंबल नदी बेहद महत्वपूर्ण हैं। नदी में दुर्लभ श्रेणी की ब्लेक वेली टर्न, रिवर लेपविंग, रिवर टर्न, ग्रेट थिकनी आदि चिड़ियां भी देखने को मिली हैं। उन्होंने बताया कि वह इंडियन स्कीमर की वंश वृद्धि न होने के कारणों का पता लगाएंगी। उन कारणों को दूर करने के उपाय खोजे जाएंगे।
वहीं दिल्ली की ज्योत्सना शेट्ठी ने कहा कि बर्ड फेस्टिवल का आयोजन बेहद उम्दा है। यूके के डोम्निक ने फेस्टिवल और चंबल को चिड़ियों के संरक्षण के लिए एक-दूसरे का पूरक बताया। यूके के टिम इनस्किप ने चंबल में इतनी संख्या में चिड़ियों की मौजूदगी पर आश्चर्य जताया। बेल्जियम के जान केलीटरमेन्स ने चंबल को चिड़ियों का स्वर्ग बताया। कहा कि, यहां की चिड़ियां देखने का और उन पर अध्ययन का मौका मिला है, जो अच्छा है।
अंधेरे में शिकार करने वाली स्पून बिल का झुंड भी दिखा
बाह। चंबल के नंदगवां और हरलाल पुरा के बीच विशेषज्ञों ने अफ्रीका, यूरोप, एशिया, जापान के पक्षी स्पून बिल का झुंड देखा। बाह के रेंजर सर्वेश भदौरिया ने बताया कि सफेद रंग, काली पतली टांगो वाले स्पून बिल की खासियत यह है कि ये अंधेरे में भी शिकार कर लेती है। इसका भोजन नदी की मछली, जलीय कीडे़ और मेंढक होते हैं। इस समय स्पून का प्रजनन काल है। यह एक बार में दो से चार अंडे देती है। सात सप्ताह में इनके शिशु उड़ान भरने लगते हैं। नर और मादा एक साथ अंडों को सेते हैं। चंबल नदी का साफ पानी इस पक्षी को भाता है। प्रजनन काल होने के कारण वन विभाग स्पून बिल के मूवमेंट पर नजर रख रहा है।
45 चिड़ियों को पहनाए छल्ले
बाह। इस साल कुल 45 चिड़ियों को छल्ले पहनाए जा सके, जबकि पिछले साल 70 चिड़ियों को छल्ले पहनाए गए थे। बांबे नेशनल हिस्ट्री सोसायटी के डा. एस बाला चंद्रन ने बताया कि कोहरे की वजह से कम चिड़ियों की रिंगिंग हो सकी है।
बेस्ट स्लोगन के लिए दिया पुरस्कार
बाह। फेस्टिवल में रविवार को चिड़ियों पर स्लोगन लिखने की प्रतियोगिता हुई। इसमें मैनपुरी के विश्वनाथ सिंह इंटर कालेज, तपस्थली इंटर कालेज, आदर्श राष्ट्रीय आवासीय विद्यालय, डीएवी इंटर कालेज के कई छात्र-छात्राएं शामिल हुए। मैनपुरी की कंचन, अनुराग यादव, अंकुल, अलका ने क्रमश: पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा स्थान हासिल किया। सात साल की आर्या को विशेष पुरस्कार दिया गया।
बिना बिक्री लौट गए शिल्पी
बाह। रविवार को बर्ड फेस्टिवल का समापन हो गया। लेकिन हस्त शिल्पियों के स्टालों पर बिक्री शुरू नहीं हो सकी। बनारसी साड़ियों का स्टाल लगाने वाले जमील अहमद, कांच की चिड़ियों का स्टाल लगाने वाले अशोक कुुमार, दरी की स्टाल लगाने वाले कानपुर के मोहम्मद अंसारी, गुड़ियों का स्टाल लगाने वाले गिरजा देवी बिना बिक्री किए ही अपने घर लौटने को मजबूर हो गए।