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चंबल नदी में बढ़ा डाल्फिन का कुनबा

Sun, 19 Jul 2015 02:10 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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 चंबल नदी की आवोहवा डाल्फिन को भा रही है। जहां सोन और केन नदी में डाल्फिन नहीं मिली, वहीं चंबल नदी में इनकी संख्या बढ़कर अब 71 हो गई है। अकेले बाह रेंज में इनकी संख्या 14 से 19 के बीच मिली है।
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रेड जोन में आई डाल्फिन को बचाने की पहल पांच अक्टूबर 2009 में केन्द्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर की थी। रेड जोन के सर्वे की रिपोर्ट में चंबल नदी में इनकी संख्या 71 पाई गई है। 1998 में सोन में 10 और केन में 7 डाल्फिन मिली थी। जबकि बीते दो साल से सोन और केन नदी में डाल्फिन नहीं मिली हैं। विशेषज्ञों ने मान लिया है कि इन नदियों मेें डाल्फिन अब नहीं हैं। वही, चंबल नदी में बाह के अटेर, हथकांत और इटावा के पचनदा, मध्य प्रदेश के बरही, मघारा, दीनपुरा के घाटों के आसपास गहरे पानी वाले इलाके में समूह में इनकी मौजूदगी मिली है। रेंजर आरके शर्मा ने बताया कि विभिन्न सर्वे के दौरान डाल्फिन की संख्या बाह रेंज में 14 से 19 के बीच मिली है। वहीं, चंबल नदी में 71 डाल्फिन की मौजूदगी पर मुरैना के रेंजर रिशीकेश शर्मा ने बताया कि पिछले साल चंबल नदी में 66 डाल्फिन थी। इस साल इनकी संख्या में पांच का इजाफा हुआ है। यह चंबल सेंक्च्युरी के लिए अच्छा संकेत है। चंबल का पानी डाल्फिन के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।
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डाल्फिन एक नजर में
डाल्फिन को हिंदी में सूस कहते हैं। चंबल में डेढ़ फीट तक की छलांग लगा लेती है। लंबाई 170 सेमी के लगभग होती है। नवंबर से जनवरी तक प्रजनन काल होता है। यह बच्चे देती है।
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