13 अप्रैल से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र में मां जगदंबा घोड़े पर सवारी करके पधारेंगी। मंगलवार के दिन अश्विनी नक्षत्र, अमृत सिद्ध योग बन रहा है। सूर्य रात्रि में मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यह अति शुभ फलदायी होंगे।
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवरात्र प्रारंभ होंगे। नवरात्र के नौ दिवसों में मां जगदंबा के नौ स्वरूपों की पूजा, आराधना विधि विधान से की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार मां दुर्गा का विधि विधान से पूजन करने से सभी मनोकामना पूर्ण होंगी। कष्ट दूर होते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि घोड़े पर सवार होकर पधारने से देश की सैन्य शक्ति में वृद्धि के योग बन रहे हैं। नवमी तिथि पर बुधवार के दिन मां भगवती दुर्गा माता हाथी पर सवार होकर जाएंगी। हाथी पर सवार होकर जाने का तात्पर्य है कि इस वर्ष वर्षा के ज्यादा होने के योग बनेंगे।
उन्होंने बताया कि अमृत सिद्ध योग होने पर कोई भी कार्य सिद्ध करने पर सफलता मिलने के साथ शुभ और स्थायित्व फल प्राप्त होते हैं। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, द्वितीय में मां ब्रह्मचारिणी, तृतीय में मां चंद्रघंटा, चतुर्थ में मां कूष्मांडा, पंचम में मां स्कंदमाता, षष्ठ में मां कात्यायनी, सप्तम में मां कालरात्रि, अष्टम में मां महागौरी, नवम में सिद्धि दात्री माता की पूजा का विधान है।
कलश स्थापना मुहूर्त
प्रात: काल 6:20 से 9:59 बजे तक शुभ मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11:41 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा।
नवसंवत्सर आनंद की शुरुआत होगी
13 अप्रैल 2021 से विक्रम संवत 2078 हिंदू नव वर्ष शुरू होगा। शास्त्रों के अनुसार, 2078 संवत्सर का नाम आनंद होगा। इसके प्रभाव से जीवन में महामारी का प्रकोप कम हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय बताती हैं कि सूर्य सिद्धांत के अनुसार संवत्सर बृहस्पति ग्रह के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। गुरु बृहस्पति 12 वर्ष में सूर्य की एक परिक्रमा पूर्ण करते हैं।