याचिका समिति के सामने जब लंबित प्रकरणों की फाइलें खुलीं, तो आंकड़ों ने सबको चौंका दिया। विकास के दावों के बीच कई विभागों में कार्य अधूरे मिले। नगर निगम के 14, पंचायती राज विभाग के 9 और पीडब्ल्यूडी व जिला पंचायत में 8-8 मामले लंबित मिले।
सदन में गूंजने वाले सवाल नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, जिला पंचायत से पंचायत राज विभाग की फाइलों में धूल फांक रहे हैं। जनहित के 40 से अधिक लंबित मामलों पर शनिवार को सर्किट हाउस में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की याचिका समिति की बैठक में विभागों की लापरवाही पर सभापति नाराज दिखे।
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याचिका समिति के सभापति अशोक कुमार अग्रवाल ने सभी अधिकारियों से कहा कि जनप्रतिनिधि गांव और शहर से जुड़े मुद्दे सदन में रखते हैं, जिनका प्राथमिकता पर निस्तारण कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जब लंबित प्रकरणों की फाइलें खुलीं, तो आंकड़ों ने सबको चौंका दिया। विकास के दावों के बीच कई विभागों में कार्य अधूरे मिले। नगर निगम के 14, पंचायती राज विभाग के 9 और पीडब्ल्यूडी व जिला पंचायत में 8-8 मामले लंबित मिले।
सभापति अशोक अग्रवाल ने अफसरों से पूछा कि आखिर कार्य शुरू होने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन कार्यों को अब तक स्वीकृति नहीं मिली है, उन्हें आगामी जिला पंचायत बोर्ड बैठक और पीडब्ल्यूडी की वार्षिक कार्य योजना में तत्काल शामिल किया जाए। उन्होंने हर कार्य के टेंडर, वर्क ऑर्डर और स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट तलब की है।
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डीएम ने दिया कार्रवाई का भरोसा
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने समिति को आश्वस्त किया कि सभापति के निर्देशों पर अमल होगा। बैठक में समिति सदस्य उमेश द्विवेदी, ऋषिपाल सिंह, मुकुल यादव, रमा निरंजन, विजय शिवहरे, आकाश अग्रवाल, सीडीओ प्रतिभा सिंह, डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार आदि मौजूद रहे।