जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए ये करना होगा
- एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाना अनिवार्य होगा, जिससे किचन, लांड्री और घरेलू सीवेज का शोधन किया जा सके।
- शोधित सीवेज का उपयोग टॉयलेट फ्लशिंग, फर्श धोने और बगीचे में किया जाएगा।
- पानी की खपत के लिए मीटर लगाना होगा। ईटीपी पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर लगाना होगा।
- भूगर्भ जल के दोहन के लिए बोरिंग को संबंधित विभाग की अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति के भूगर्भ जल दोहन पर कार्रवाई की जाएगी।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।
वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए ये करना होगा
- जनरेटर में उसी ईंधन का उपयोग किया जा सकेगा, जिसके लिए अनुमति होगी।
- खाना पकाने और रसोई से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए उचित इंतजाम करने होंगे
- कमरों में रोशनी, पानी गर्म करने में सौर ऊर्जा का उपयोग करना होगा।
- पर्यावरण को क्षति पहुंचाने पर सीपीसीबी और यूपीपीसीबी जुर्माना कर सकेंगे।
कूड़ा निस्तारण के लिए ये करना होगा
- 100 किग्रा प्रतिदिन का कूड़ा जनरेट करने वाले मैरिज होम को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा।
- बगीचे से निकलने वाले कचरे को अलग करना होगा। बाहर फेंकने के बजाय अपने परिसर में ही एकत्र करेंगे।
- खाद्य सामग्री के कचरे को अन्य कचरे के बजाय अलग रखकर खाद बनानी होगी।
- डिस्पोजेबल प्लास्टिक का कम से कम उपयोग और रिसाइकिलिंग करनी होगी।
- नगर निगम व नगर निकायों को कूड़ा लेने और निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी।
वेबसाइट पर भी डाली गाइडलाइन
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश यादव ने कहा कि एनजीटी के आदेश पर तैयार गाइडलाइन सार्वजनिक प्रकाशित की गई है। हमारी वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। अब इसी गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा। होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज होम को अनुमति देने से पूर्व संबंधित विभागों को गाइडलाइन के मानकों पर ध्यान देना होगा।