जिला अस्पताल की इंटीग्रेटेड सेंट्रल लैब 15 महीने बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इसके निर्माण पर 85 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। लैब शुरू होने से 120-150 अतिरिक्त जांचें उपलब्ध होतीं, लेकिन मरीजों को निजी लैब या एसएन मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है।
लापरवाही के चलते सरकारी योजना कैसे दम तोड़ रही हैं, इसकी बानगी जिला अस्पताल की इंटीग्रेटेड सेंट्रल लैब है। 15 महीने बीतने पर भी लैब शुरू नहीं हो सकी है। इसमें 85 लाख रुपये भी खर्च हो गए हैं। इससे मरीजों को 150 तरह की जांच की सुविधा और बढ़ जाएगी।
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जिला अस्पताल में पैथोलॉजी लैब में रक्त, यूरिन समेत अन्य की जांच की सुविधा बढ़ाने के लिए बीते साल जून में इंटीग्रेटेड लैब का कार्य शुरू हुआ। इसे ओपीडी की चौथी मंजिल पर हॉल बनाया गया है। इसमें छत की मरम्मत कार्य बाकी है, इसे बीते चार महीने से पूरा नहीं किया गया है। इस पर ताला पड़ा है। इसके बनने से बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी की जांच की सुविधा भी मिलती। इससे 120-150 तरह की जांच और बढ़ जाती।
अभी मरीजों को निजी लैब या फिर एसएन मेडिकल कॉलेज में जांच करानी पड़ रही हैं। सवा साल में भी लैब शुरू नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुनीता राठौर ने बताया कि लैब की छत समेत अन्य सिविल कार्य बाकी हैं। कार्यदायी संस्था ये कार्य नहीं कर रही है। इसके बारे में शासन को लिख चुके हैं।