आगरा। सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट और उसमें की गई सिफारिशों से आगरा के उद्योग जगत पर बुरा असर पड़ेगा। इस मामले में उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग ने प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव और इनवेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से मुलाकात कर आपत्तियां दर्ज कराई हैं और बदलाव के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।
ताजमहल के 10 किमी परिक्षेत्र में 10 प्रदूषण स्कोर से अधिक वाले उद्योगों पर प्रतिबंध के प्रस्ताव पर उन्होंने आपत्ति जताई है। अधिकारियों से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में सिर्फ 500 मीटर क्षेत्र को ही संवेदनशील जोन घोषित किया था। इस दायरे को बढ़ाकर 10 किमी. करना व्यवहारिक नहीं है। उद्योग तथा शहर के विकास के लिए भी न्यायसंगत नहीं होगा। इस निर्णय से आगरा शहर की औद्योगिक गतिविधियां लगभग ठप होने की आशंका है। वहीं, हेरिटेज सिटी आगरा में हर स्मारक के एक किमी. की बाध्यता लागू करने से लगभग पूरा शहर किसी भी विकास कार्य या औद्योगिक गतिविधि से वंचित हो जाएगा। वर्तमान में लागू 300 मीटर की बाध्यता ही व्यवहारिक एवं उपयुक्त है। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश वन संरक्षण अधिनियम 1976 के तहत प्रतिबंधित प्रजातियों को छोड़कर शेष वृक्षों को एग्रो फॉरेस्ट्री के तहत मान्यता प्रदान करने की मांग की। गर्ग ने कहा कि अधिकारियों ने सभी आपत्तियों और सुझावों को सरकार के सामने रखने का आश्वासन दिया है।