सीईसी ने मालगोदाम में पेड़ काटे जाने के मामले को लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है। सीईसी सदस्यों ने सवाल पूछने शुरू किए तो अधिकारी एक दूसरे का मुंह ताकने लगे। उनके पास कोई जवाब नहीं था।
आगरा में सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने सोमवार को बेलनगंज रेल मालगोदाम की जमीन से काटे गए पेड़ों की साइट देखी। तीन बैठकों की तरह साइट पर भी रेल लैंड डेवलपमेंट अथाॅरिटी के अफसर सीईसी सदस्यों के सवालों का जवाब नहीं दे सके। कमेटी ने मालगोदाम की जमीन पर इंस्टीट्यूट और खेल मैदान बनाने के विकल्प पर भी जवाब मांगा है।
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कैसे कट गए यहां पेड़
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की शिकायत पर बेलनगंज रेल मालगोदाम में काटे गए 23 पेड़ों की साइट पर सोमवार दोपहर सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी के दो सदस्य पहुंचे। सीईसी सदस्य सीपी गोयल और डाॅ. जेआर भट्ट ने साइट देखने के बाद आरएलडीए के अफसरों से पूछा कि यहां कितने पेड़ काटे गए और कैसे कट गए।
एक हिस्से में बची हरियाली
सीईसी ने मालगोदाम की जमीन पर हरियाली का एक हिस्सा देखा, जो लोहे की बैरिकेडिंग के कारण कटने से बच गया। सीईसी ने हरियाली के उसी घनत्व के मुताबिक पूरे मालगोदाम की जमीन पर हरियाली का आकलन करने के लिए रेलवे से कहा है।
इनकी तलाशी जाएगी संभावना
डॉ. शरद गुप्ता ने यहां खेल मैदान या रेलवे इंस्टीट्यूट बनाने के साथ मेट्रो का डिपो बनाने की संभावना तलाशने के लिए कहा। सीईसी ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण के आड़े आ रहे पेड़ों की साइट भी देखी। एनएचएआई की याचिका पर भी सीईसी को 24 जनवरी से पहले अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
पेड़ काटे गए, तभी तो आए
निरीक्षण के दौरान सीईसी के सदस्यों ने कहा कि यहां पेड़ काटे गए हैं। सख्त कार्रवाई होगी। टीम ने मालगोदाम के एक हिस्से की हरियाली देखकर कहा कि इतने बड़े हिस्से से हरियाली गायब कर दी गई और रेलवे को पता नहीं चला, ऐसा संभव नहीं। डॉ. शरद गुप्ता ने सेटेलाइट चित्र और अपने निरीक्षण के फोटो दिखाए। सीईसी के सदस्य 24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट दाखिल करेंगे। इसमें वह मालगोदाम मामले में जुर्माना और अन्य विकल्पों पर भी अपनी रिपोर्ट सौंप सकते हैं। रेलवे अफसरों की भूमिका को लेकर सीईसी नाराज है।