आगरा के बैंक लोन घोटाले में गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने चार दोषियों में से तीन को सात-सात साल और एक को पांच साल कैद की सजा सुनाई है।
आगरा में 30 साल पहले यूको बैंक शाखा में हुए घोटाले के मामले में शुक्रवार को सजा पर बहस हुई। जिसके बाद विशेष न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद की अदालत ने सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए अर्थदंड भी लगाया है।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक कुलदीप पुष्कर ने बताया कि 1988 में आगरा के अछनेरा गांव स्थित यूको बैंक की शाखा में फर्जी कागजों के आधार पर लघु उद्योग के नाम पर लोन की हेराफेरी की सूचना मिलने पर सीबीआई ने जांच की थी।
गलत तरीके से दिया गया था लोन
जांच में पाया कि पूर्व बैंक मैनेजर महक सिंह, फील्ड ऑफिसर हरदेव सिंह, खाताधारक व कथित पशु विक्रेता चांद और प्राइवेट व्यक्ति इस्माइल खान ने लोन लेने व देने की प्रक्रिया को गलत तरीके से इस्तेमाल किया है।
अभियुक्त इस्माइल फर्जी कागजों पर अंगूठा लगाकर पशुओं की खरीद के नाम पर चार से पांच हजार रुपए का लोन बैंक से दिलवाता था। वो करीब 22 लोगों के लोन करीब 85 हजार रुपए बैंक से कथित पशु विक्रेता चांद के खाते में ट्रांसफर करा चुका था।
इसके साथ ही फील्ड ऑफिसर ने मौके पर जाकर इन कागजों को वेरीफिकेशन नहीं किया था, उसने बैंक मैनेजर के साथ मिलकर रुपए दिलवा दिए थे। इस कारण सीबीआई ने दोनों को भी केस का अभियुक्त बनाया।
इन दोषियों को मिली सजा
शुक्रवार को सभी दोषियों को अदालत में पेश किया गया। दोपहर बाद सजा पर दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें दीं। उसके बाद कोर्ट ने देर शाम तक के लिए फैसला रिजर्व कर लिया।
शाम करीब छह बजे अदालत ने दोषी अभियुक्त हरदेव सिंह निवासी सिकंदरा को सात साल की कैद और 41 हजार रुपए अर्थदंड, इस्माइल खान को सात साल की सजा व 26 हजार रुपये अर्थदंड और चांद मोहम्मद निवासी सराय खुवाना आगरा को पांच साल की कैद व 10 हजार रुपये अर्थदंड दिया।
वहीं दोषी अभियुक्त महक सिंह निवासी अशोक नगर दिल्ली को सात साल की सजा और 41 हजार रुपए अर्थदंड लगाया। अगर जुर्माना राशि जमा नहीं की तो अभियुक्तों को अतिरिक्त कारावास काटना होगा।