खाद्य विभाग की जांच में जनवरी में आए 795 नमूनों में से 273 फेल और 53 नकली पाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा मिलावट दूध, खोआ और घी में मिली। अधिकारियों ने मिलावटखोरों पर जुर्माना और एफआईआर की कार्रवाई शुरू की है, जबकि आमजन को सतर्क रहने और शिकायत नंबर 18001805533 पर सूचना देने की अपील की गई है।
दूध से क्रीम निकाली, स्टार्च-रिफाइंड मिलाया और खोआ तैयार। ऐसे ही घी में पाम ऑयल मिलाया और शुद्ध देसी घी का रैपर लगाकर बाजार में खपाया। त्योहारों पर मिलावट माफिया ऐसी ही मिलावटखोरी कर रहे हैं। खाद्य विभाग की जांच में हर तीसरा नमूना मिलावटी मिल रहा है। सबसे ज्यादा मिलावट दुग्ध उत्पादों में है।
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खाद्य विभाग को जनवरी में 795 नमूनों की रिपोर्ट मिली, जिसमें 273 नमूने फेल पाए गए। इनमें से 53 नमूने नकली मिले। 200 नमूने घटिया और मिलावटी व 20 नमूनों पर गलत जानकारी दर्ज मिली। ये नमूने फुटकर दुकानों, डेयरी के साथ ही प्लांट से लिए गए थे। सहायक आयुक्त खाद्य महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि दूध, खोआ, मसाले, पनीर के नमूने नकली मिले हैं। विक्रेताओं के खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ ही प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।
दूध, खोआ और पनीर सबसे ज्यादा नकली
जांच में दूध के 111 में से 81 नमूने फेल मिले, जिसमें 10 नकली थे। खोआ के 28 में से 18 फेल मिले, जिसमें पांच नकली थे। घी की बात करें तो 51 में से 33 नमूने फेल पाए गए जिसमें 14 नमूने नकली मिले। आटा भी घटिया पाया गया। इसके 44 में से 15 नमूने फेल मिले और तीन नकली पाए गए।
ये मिली मिलावट
सामग्री मिलावट
हल्दी: पीला रंग
बेसन: मक्का का आटा
धनिया और मिर्च: डंठल, बुरादा और रंग।
नमकीन: घुनी हुई मूंगफली।
खोआ: स्टार्च, रिफाइंड।
दूध: पानी, यूरिया और रिफाइंड
घी: पाम आयल, रिफाइंड।
ऐसे कर सकते हैं शुरुआती जांच
- दूध: एक घूंट पीएं और कुल्ला कर दें, नकली दूध होने पर शुरुआत में मीठा और फिर कसैला लगेगा।
- मसाले: हल्दी-मिर्च और धनिया में रंग मिला है तो पानी डालने पर रंग पीला और हरा हो जाएगा।
- पनीर: सिंथेटिक पनीर कठोर होगा, दबाने पर बिखर जाएगा, चिकनाई कम होगी। स्वाद में अंतर।
- घी: मिलावटी-नकली होने पर रेफ्रिजरेटर में रखने पर पूरी तरह से जमेगा नहीं। गर्म करने पर एसेंस की खुशबू नहीं रहेगी।
-नकली-मिलावटी खाद्य सामग्री की इस नंबर पर करें शिकायत - 18001805533
पेट रोग और एलर्जी का खतरा
डिप्टी सीएमओ डाॅ. नंदन सिंह ने बताया कि मिलावटी और नकली सामग्री से एलर्जी, पेट में संक्रमण तेजी से होते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। लंबे समय तक इसके उपयोग करने से हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, किडनी, लिवर रोग का खतरा अधिक है।