शहर व गांवों में छुट्टा गोवंशों का आतंक है। नगर निगम का दावा है कि 2 साल में 10 हजार से अधिक गोवंश पकड़े गए। पर, धरातल पर हालात नहीं बदले। शनिवार को सांड़ों की लड़ाई में एक युवक की मौत हो गई। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी छुट्टा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं।
जिले में 15 ब्लॉक और 6 तहसील हैं। कैटल कैचर (पशु पकड़ने का वाहन) एक है। वो भी जिला पंचायत का है। नोडल विभाग पशुपालन के पास नहीं हैं। इधर, शहर के 100 वार्डों में नगर निगम के पास 7 कैटल कैचर हैं। पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार का कहना है कि रोज औसतन 50 पशुओं को पकड़ा जा रहा है। फिर भी नियंत्रण नहीं हो पा रहा।
शहर में ही पशुओं को पकड़ा जा रहा है जबकि गांव-देहात में कोई व्यवस्था नहीं। ऐसे में त्रस्त ग्रामीण सांड़ व गोवंश को शहर की तरफ हांक रहे हैं। फतेहाबाद रोड पर रमाडा से लेकर सेल्फी पॉइंट तक दिनभर आवारा सांड़ घूमते हैं। फतेहपुरी सीकरी रोड, रुनकता, शास्त्रीपुरम, कालिंदी विहार, ट्रांस यमुना के अलावा रोहता, सेवला रोड पर भी हजारों की तादाद में छुट्टा गोवंश घूम रहे हैं।