उन्होंने बताया कि प्रतिवादी संख्या 4 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की तरफ से न्यायालय के समक्ष मेमोरैंडम लगाकर सर्वे आदि की मांग पर जवाब प्रस्तुत करने के लिए और समय मांगा गया है। जिसके लिए न्यायालय ने अगली सुनवाई हेतु 28 अक्तूबर की तिथि सुनिश्चित की है। इसके साथ ही अन्य तीनों प्रतिवादीगणों को पुन: नोटिस जारी करने के लिए आदेश दिया गया है।
प्रथम पक्षकार सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन की तरफ से कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने उपस्थित होकर न्यायालय में निवेदन कर शीघ्र सर्वे हेतु अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि में प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति विग्रह समस्त यदुवंशी, क्षत्रिय, जादौन, जडेजा, भाटी, छौंकर, रावल, चूड़ासमा आदि कृष्ण वंशजों के इतिहास की विरासत है।
साथ ही भारत की भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण सनातन वैष्णव जनों के ईष्ट भगवान हैं, इसलिए उन सबके भाव के साथ सैकड़ों वर्षों से अपमान होता आ रहा है। उनके आराध्य भगवान जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दबे हैं, इसलिए समस्त सनातन धर्म के भाव की रक्षा हेतु जामा मस्जिद की सीढ़ियों का सर्वे कराया जाए। इस सुनवाई के दौरान पीठ की महामंत्री नीतू सिंह चौहान, कुंवर विक्रम सिंह राठौड़ सहित अधिवक्ता रागिनी सिंह चौहान आदि मौजूद रहीं।