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कारतूस प्रकरण: नक्सलियों से लेकर पेशेवर अपराधियों तक कारतूसों की तस्करी का शक, अब शस्त्र की दुकानों पर भी नजर 

Fri, 29 Apr 2022 05:19 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

टूंडला स्टेशन पर 700 अवैध कारतूसों पकड़े गए थे। इस मामले में जीआरपी ने फिरोजाबाद के शादाब व उसके भाई फैजान को पकड़ा था। पूछताछ में कारतूसों की अवैध तस्करी के बारे में जानकारियां मिलीं, जिसके बाद जीआरपी ने कारतूस तस्करों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।  
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बरामद कारतूस
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विस्तार
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फिरोजाबाद के टूंडला में अवैध कारतूसों का जखीरा पकड़े जाने के बाद जीआरपी की टीमें कारतूस तस्करों पर शिकंजा कस रही हैं। तस्करों के तार कई जिलों से जुड़े हुए हैं। मेरठ गन हाउस पर छानबीन हो चुकी है। शहर के शस्त्र विक्रेताओं के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। एसपी जीआरपी ने बताया कि इसके लिए जिलाधिकारी को पत्र लिख रहे हैं। जीआरपी की 12 टीमें अलग-अलग जिलों में छानबीन कर रही हैं।

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टूंडला जंक्शन से 22 अप्रैल को 700 अवैध कारतूस के साथ जीआरपी ने फिरोजाबाद के शादाब व उसके भाई फैजान को पकड़ा था। इनसे पूछताछ में कारतूसों की अवैध तस्करी के बारे में जानकारियां मिलीं थीं। इसके बाद से जीआरपी आगरा अनुभाग की टीमें चार तस्करों को गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी हैं।

जीआरपी ने 24 अप्रैल को कारतूस तस्कर सरगना अमरोहा निवासी प्रतीक सक्सेना को गिरफ्तार किया गया। 26 अप्रैल को प्रतापगढ़ निवासी आशीष मिश्रा को 4000 अवैध कारतूसों के साथ पकड़ा। अवैध कारतूसों के मामले में फरार चल रहे फिरोजाबाद निवासी फिरोज उर्फ राशिद पर इनामी राशि को 25 हजार रुपये से बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। राशिद अभी तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका है। जीआरपी एसपी मुश्ताक अहमद का कहना है कि कारतूस प्रकरण में आगरा सहित आसपास के जिलों में टीमें छानबीन कर रही हैं।

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चार महीने में बेच दिए चार हजार अवैध कारतूस

जीआरपी ने अवैध कारतूसों की तस्करी के मामले में बुधवार को प्रतापगढ़ निवासी आशीष मिश्रा को गिरफ्तार किया था। उसने चार महीने में तकरबन चार हजार कारतूस उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों में सप्लाई किए हैं। एसपी जीआरपी मुश्ताक अहमद के मुताबिक, आशीष मिश्रा सादाब और फिरोज के साथ काम कर रहा है। वो इन दोनों से ही सस्ते दाम में कारतूस की खरीद करता है। इसके बाद यूपी और बिहार के जिलों में बेच देता है। इन राज्यों के ही अपने गैंग के सदस्यों से पिस्टल खरीदता है। इसके बाद प्रतापगढ़ सहित अन्य जिलों में बेचता है।
उसकी तीन साल पहले आशीष की मुलाकात फिरोज से लखनऊ में हुई थी। उसके फिरोज के माध्यम से ही प्रतीक सक्सेना के संपर्कमें आया था। उससे ही कारतूस खरीदता था। चार महीने में चार हजार से अधिक कारतूस बेच चुका है। जीआरपी अब यह पता कर रही है कि कारतूस खरीदने वाले कौन हैं। 

नक्सलियों से लेकर पेशेवर अपराधियों को बेचने की आशंका

जीआरपी को आशंका है कि अवैध कारतूस नक्सलियों के साथ ही पेशेवर अपराधियों को भी बेचे गए हैं। इस संबंध में अहम सुराग मिले हैं। यूपी के अलावा हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश प्रदेश में भी अवैध कारतूस बेचने की आशंका है। इस पर जीआरपी की टीम लगाई गई है। इस गैंग से जुड़े फिरोजाबाद निवासी शादाब, उसका भाई फैजान और प्रतापगढ़ का आशीष मिश्रा हाथ आ चुका है। गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में टीम लगी है। आगरा में तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने गन हाउस की जांच कराई थी। कारतूस का सत्यापन किया गया था। अवैध तरीके से कारतूस की बिक्री करने पर संचालकों पर कार्रवाई की गई थी। अब फिर से गन हाउस से अवैध तरीके से कारतूसों की बिक्री का मामला सामने आने पर जांच की तैयारी कर ली गई है।

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