आचार संहिता लगने के बाद कैश ट्रांजेक्शन की चेकिंग के लिए नौ विधानसभा क्षेत्र में गठित की गई 27 टीमें अभी तक 41 लाख रुपये पकड़ चुकी हैं। इत्तफाक से सभी रकम कारोबारियों की रही है। एक भी मामले में साबित नहीं हो पाया है कि कैश चुनाव में इस्तेमाल के लिए ले जाया जा रहा था। ऐसे में कारोबारियों में गुस्सा है। वह इस चेकिंग को उत्पीड़न बता रहे हैं। उन्होंने एसएसपी से कहा है कि इस कार्रवाई से कारोबार चौपट हो जाएगा। इससे पहले नोटबंदी के चलते व्यापार प्रभावित रहा। अब कारोबारी बैंक में कैश ले जाने से भी डर रहे हैं।
आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल का कहना है कि उनकी एसएसपी से बात हुई है। सराफा, लोहा, किराना समेत सभी व्यापार मंडलों के नेता 11 जनवरी की शाम को एसएसपी से उनके आवास पर मिलेंगे। अग्रवाल का कहना है कि अगर व्यापारी के पास बैंक का भरा हुआ वाउचर, पेन कार्ड और आई कार्ड है, तो पुलिस को उसे जाने देना चाहिए, उसका कैश जब्त करने का मतलब उत्पीड़न करना है ।
इस पर एसपी सिटी सुशील कुमार घुले का कहना है कि जनपद में प्रत्येक विधानसभा में तीन टीम कैश चेकिंग के लिए गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में एक मजिस्ट्रेट है। अगर कैश से संबंधित ब्योरा और कागजात दिखा दिए जाएं तो मजिस्ट्रेट के आदेश पर कैश तुरंत रिलीज कर दिया जाता है। अगर बाद में भी ब्योरा और कागजात मिल जाएं तो भी कैश वापस दे दिया जाता है।