मैनपुरी। नगर पालिका चेयरमैन के लिए चार मई को हुए मतदान के बाद एक मंच पर 20 साल बाद सत्ताधारी दल के प्रत्याशी के खिलाफ गैर भाजपाई प्रत्याशी एक मंच पर आ गए हैं। वर्ष 2004 में लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी के खिलाफ गैर सपाई प्रत्याशी एक मंच पर आ गए थे। नगर के संता बसंता चौराहे पर दो दिन तक धरना भी दिया था। चार मई को नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान में गैर भाजपाई प्रत्याशियों ने भाजपा प्रत्याशी, उनके पति सहित भाजपा नेताओं पर मतदान केंद्रों पर कब्जा करके फर्जी मतदान करने और कराने के आरेाप लगाए हैंं। अपने आरोपों की मजबूती के लिए सपा, बसपा, कांग्रेस सहित दो निर्दलीय प्रत्याशी एक मंच पर आ गए हैं। सोमवार को संयुक्त रूप से पे्रसवार्ता करके अपनी एकजुटता का परिचय दिया है। मतगणना की निष्पक्षता के लिए गैर भाजपाई प्रत्याशी एक मंच से अपनी लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट हो गए हैं।
वर्ष 2004 में तत्कालीन सांसद मुलायम सिंह यादव द्वारा मैनपुरी सीट छोडने के बाद उपचुनाव हुआ था। उपचुनाव में पहली बार मुलायम सिंह यादव ने अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया था। सपा सरकार में मतदान के दिन मतदान केंद्रों पर हुई हिंसा तथा बूथ कैप्चरिंग के आरोपों को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी सुमन चौहान, भाजपा प्रत्याशी रामबाबू कुशवाहा, बसपा प्रत्याशी अशोक शाक्य एक मंच पर आए थे। नगर के संता बसंता चौराहे पर दो दिन तक धरना दिया था। इसके बाद उपचुनाव निरस्त कर दिया गया था।
नगर पालिका के चुनाव के बाद गैर भाजपाई प्रत्याशियों की एकजुटता ने 20 साल पहले हुए घटनाक्रम की याद दिला दी है। वैचारिक मतभेद होने के बाद भी कांग्रेस की आराधना गुप्ता, सपा की सुमन वर्मा, बसपा की रेखा पांडेय, निर्दलीय नेहा गुप्ता, ऊषादेवी मतगणना की निष्पक्षता के लिए एक मंच पर आने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने संयुक्त रूप से एकजुट होकर अपनी लड़ाई लडने का निर्णय लिया है। संवाद
दो लोगों की हुई थी हत्या
वर्ष 2004 के उपचुनाव में करहल विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र मगरिया (सराय मुगलपुर) के बाहर सपा और बसपा समर्थकों के बीच जमकर हिंसा हुई थी। मतदान केंद्र के बाहर हुई फायरिंग में मगरिया निवासी अबधेश शाक्य तथा सैफई निवासी मनोज यादव की हत्या तक कर दी गई थी। मतदान के दिन एक ही मतदान केंद्र के बाहर दो लोगों की हुई हत्या के बाद उपचुनाव को चुनाव आयोग ने निरस्त करके उपचुनाव दोबारा कराया था।