मैनपुरी। जिले में संचालित एंबुलेंस सेवा में प्रोग्राम मैनेजर की मिलीभगत से फर्जी केस दर्ज किए जा रहे हैं। तीन मई को एक मामला सामने आने पर अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रोग्राम मैनेजर की रिपोर्ट पर विभाग ने ईएमटी को सेवा से बाहर का आदेश जारी कर दिया है। वहीं पायलट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नौनेर निवासी अमित कुमार तीन नवंबर की सुबह अपने 15 दिन के पुत्र को हालत बिगडने पर एंबुलेंस से सौ शैया अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां से वापस बच्चे को घर जाना था। इसके लिए अमित ने 102 एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल किया जिसके बाद उसे यूपी 32 ईजी 1318 एंबुलेंस मिली। जब वह बच्चे को इसी एंबुलेंस से घर ले जा रहा था तभी पास में खड़ी यूपी 32 ईजी 0467 के ईएमटी और पायलट ने यहां आकर उसके बच्चे का फोटो कर लिया। दोनों ने ही एक ही फोटो 102 सेवा के पोर्टल पर अपलोड कर दिया। अमित को कुछ शक हुआ तो उसने मामले की शिकायत 102 एंबुलेंस सेवा के लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से की थी। मामले में जिला प्रोग्राम मैनेजर की रिपोर्ट पर विभाग ने ईएमटी को दोषी मानकर सेवा से बाहर का आदेश जारी कर दिया है। जबकि एंबुलेंस के पायलट पर कोई कार्रवाई नहीं की है। विभागीय सूत्रों की मानें तो पता चला है कि जब कोई भी केस दर्ज होता है तो उस पर ईएमटी के साथ पायलट के भी हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में कार्रवाई संदेह के घेरे में है।
शिकायत के आधार पर ईएमटी पर कार्रवाई की गई है। पायलट को इसमें कोई दोष नहीं है। इसलिए पायलट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सचिन कुमार, जिला प्रोग्राम मैनेजर