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कैंसर से इन लोगों ने जीत ली जिंदगी की जंग

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03एमएनपी-13-बबलू गुप्ता - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। कैंसर जानलेवा है, यह धूम्रपान करने और तंबाकू खाने से ज्यादा होता है। वर्तमान में मैनपुरी जिले में मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या करीब 550 के आसपास है। इतनी बड़ी संख्या में कैंसर होने का कारण कपूरी तंबाकू है। प्रति वर्ष बड़ी संख्या में लोग कैंसर से मर रहे हैं। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने कैंसर से जिंदगी की जंग जीत ली है। आज ये लोग युवा पीढ़ी को सीख दे रहे हैं, इनका कहना है कि कोई भी शौक जिंदगी से ऊपर नहीं है। इसलिए युवा पीढ़ी धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने से बचे।
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समय से लिया इलाज
शहर के मोहल्ला चौथियाना निवासी वीरेंद्र सिंह को तंबाकू खाने की वजह से करीब दस वर्ष पहले कैंसर हुआ। जानकारी समय से हो जाने पर उन्होंने ग्वालियर में इलाज लेना शुरू कर दिया। करीब एक वर्ष तक उनका इलाज चला। मुंह का ऑपरेशन करके डॉक्टरों ने उन्हें नया जीवन दिया। वीरेंद्र कहते हैं कि युवा पीढ़ी बीड़ी सिगरेट और तंबाकू से दूर रहे।
कोई भी शौक जिंदगी से बढ़कर नहीं
पंजाबी कॉलोनी निवासी बबलू गुप्ता पेशे से दुकानदार हैं। करीब 12 साल पहले उन्हें मुंह का कैंसर हो गया। जानकारी हुई तो इलाज लेना शुरू किया। डॉक्टरों ने उनकी जिंदगी बचा ली, लेकिन इलाज अभी तक चल रहा है। कैंसर के कारण कामकाज प्रभावित हुआ, इलाज पर लाखों रुपये खर्च हुए। इससे परिवार को भी परेशान होना पड़ा। उनका कहना है कि कोई भी शौक जिंदगी से बढ़कर नहीं है।
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तंबाकू का सेवन न करें
छपट्टी मोहल्ला निवासी धनपाल सिंह को 2005 में कैंसर हो गया। आगरा, ग्वालियर और दिल्ली में इलाज कराकर लाखों रुपये खर्च किया। पेशे से दुकानदार थे, इसलिए बीमार होने से आमदनी भी बंद हो गई। उन्हें तो डॉक्टरों ने बचा लिया, लेकिन उनका कहना है कि कैंसर का बड़ा कारण तंबाकू है, इसलिए युवा पीढ़ी तंबाकू के सेवन से बचे।
समय से इलाज ही बचा सकता है जान
कैंसर जानलेवा है। अगर पीड़ित को समय से इलाज मिल जाए तो उसकी जान को बचाया जा सकता है। मैनपुरी में कैंसर फैलने का सबसे बड़ा कारण कपूरी और मैनपुरी तंबाकू है। स्वास्थ्य विभाग लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है, बावजूद इसके युवा पीढ़ी तंबाकू का सेवन करना बंद नहीं कर रही है।
डॉ. अभिषेक दुबे, जिला अस्पताल के चिकित्सक
कैंसर यूनिट का नहीं खुला ताला
जिले में नौ साल पहले स्थापित की गई कैंसर यूनिट का संचालन आज तक शुरू नहीं हो सका है। कैंसर यूनिट की स्थापना पर सात करोड़ रुपये प्रदेश सरकार की ओर से खर्च किए गए। इसके साथ ही 2010 में 6.50 करोड़ की लागत से यहां मशीनों की स्थापना कराई गई थी। 2015 में मशीनों को सही कराने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। 2018 में कैंसर यूनिट को चालू करने के लिए मशीनों की टेस्टिंग की गई, लेकिन खर्च अधिक होने के कारण आगे कार्रवाई नहीं बढ़ सकी।
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