नंदिनी ने छह सितंबर को भूपेंद्र को फोन किया था। दोनों की बातचीत भूपेंद्र के मोबाइल में कैद हो गई। नंदिनी बहुत डरी हुई थी। छिपते छिपाते घर से दूर जाकर बात कर रही थी । उसने भूपेंद्र से कहा था कि अब ये लोग ( परिवार) उसे जीने नहीं देंगे।
उस पर पहरा लगा दिया गया है। वह कहीं जाती है तो कोई न कोई साथ जाता है। चंदन ने उसे बात करते देख लिया, तो भाई को बताया। उससे मोबाइल छीन लिया। उसे पीटा गया और अपशब्द कहे गए।
नंदिनी ने बताया था कि उसे लगता है कि उसके परिवार के लोग उसे मार डालेंगे। हो सकता है कि करंट से मार दें या फिर कोई और चाल चलें। भूपेंद्र भी यही कह रहा था कि उसके कानों तक यह बात पहुंच चुकी है कि वे लोग उसे मार देंगे।
हत्या के लिए ही पुलिस से बोला झूठ
नंदिनी जब दूसरी बार घर से भागी तो पांच सितंबर को बरामद की गई। उसके जाते ही उसके परिवार वालों ने सोच लिया था कि अब उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे। पुलिस ने बताया कि इन लोगों ने उसके अपहरण की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। सिर्फ गुमशुदगी लिखवाई थी।
उसे नाबालिग बताया था। उसकी बरामदगी पर उसे ले गए। कह रहे थे कि प्यार से समझाएंगे। अगर उसका अपहरण लिखवाते या उसे बालिग बता देते, तो पुलिस कोर्ट में बयान दर्ज कराती। ऐसे में वह प्रेमी के साथ जाने की बात कह देती तो उनकी साजिश पर पानी फिर जाता।
लाश फूंकने में शामिल 20 लोग भी जाएंगे जेल
नंदिनी की हत्या के मामले में 20 और लोगों की गिरफ्तारी की तैयारी हैं। इन पर साक्ष्य मिटाने का आरोप है। ये लोग जानते थे कि नंदिनी की हत्या की गई है। इसके बावजूद वे लोग लाश फूंकने में शामिल रहे। खेत में ही चिता तैयार की गई।
इन लोगों ने पूरा सहयोग किया। रात में ही शव फूंक दिया गया। पुलिस के आने की सूचना मिलते ही ये लोग भी भाग गए। अब इनकी सूची बन रही है। थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि इन सभी की गिरफ्तारी की जाएगी।