आयकर विभाग की पांच दिन चली सर्च के बाद करीब एक लाख करोड़ रुपये विदेश भेजने के कथित मामले में आगरा में पहली बड़ी कार्रवाई हुई है। ताजगंज निवासी सीए रेहान खान के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने और शेल कंपनियों के जरिए रकम विदेश भेजने में मदद करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई है।
शेल कंपनियों की मदद से देश से करीब 1 लाख करोड़ रुपये विदेश भेजने के मामले में आयकर विभाग की 18 अगस्त से चली पांच दिन की सर्च के बाद पहली बड़ी कार्रवाई हुई है। आयकर विभाग की अन्वेषण विंग के उपाय कर निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने ताजगंज निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट रेहान खान के खिलाफ फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने, शेल कंपनियों के जरिए देश से पैसा बाहर भिजवाने में मदद करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाते हुए ताजगंज थाने में प्राथमिक की दर्ज कराई है।
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आयकर विभाग की ओर से यह कार्रवाई पांच दिन तक रेहान के अलावा देश भर के कई शहरों में 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट और 346 कंपनियों व फर्म के ठिकानों पर चली। विभाग का दावा है कि इस जांच के दौरान इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि रेहान खान ने हजारों करोड़ रुपये का काला धन विदेश भिजवाने में मदद की है। पूछताछ में रेहान खान ने इस बात को स्वीकार किया है कि मनी लांड्रिंग के इस पूरे खेल में सीए अभिषेक गुप्ता और निखिल हरवानी नाम के व्यक्ति भी उसके साथ शामिल थे।
सीए रेहान खान के घर की तलाशी के दौरान यह पाया गया कि उन्होंने धनराशि को विदेश भेजने के लिए बिना उचित सत्यापन के फॉर्म 15CB जारी किए। यह फॉर्म आयकर नियम, 1962 के अंतर्गत आवश्यक होते हैं।
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धोखाधड़ी का तरीका
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार, अधिकृत डीलरों द्वारा विदेश में धनराशि भेजने के लिए प्रेषकों को चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा विधिवत प्रमाणित फॉर्म 15CB प्रस्तुत करना होता है। फॉर्म 15CB के अनुसार, चार्टर्ड अकाउंटेंट का दायित्व है कि वह प्रेषक और लाभार्थी के बीच हुए समझौते तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच करे।