बेवर। कस्बा के रामलीला मैदान के सामने आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में सोमवार को कथावाचक पंडित सुरेश चंद्र द्विवेदी ने सती प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मृत्युलोक में पृथ्वी ही शक्ति है। वायुमंडल शिव है। दोनों मिलकर जीव का कल्याण करते हैं। भक्ति के मार्ग पर चलकर मनुष्य को सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया पृथ्वी, जल, वायु, आकाश, अग्नि इन पंचतत्वों की प्राणी को आवश्यकता होती है। पंचतत्व का जन्म भगवान शिव ने किया है। जल अग्नि में शिव का निवास है। पंचतत्व ही शिव के रूप में है। इनसे ही प्राणियों का जन्म हुआ है। यह पंचतत्व जीवन पूर्ण होने पर शिव में विलीन हो जाता है। जीव शिव का संबंध आदि-अनादि काल से बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर चलकर मनुष्य को सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है।
यह मनुष्य का जीवन सफल कर उसे स्वर्ग तक ले जाती है। भागवत कथा में भक्ति, ज्ञान वैराग्य महिमा का वर्णन करते हुए शास्त्री ने कहा कि जिस तरह भूखे को भोजन की और प्यासे को पानी की आवश्यकता होती है। उसी तरह प्राणी को मुक्ति के लिए वैराग्य, ज्ञान और भक्ति की जरूरत होती है। कथा परीक्षित पूर्व प्रवक्ता दुर्गानारायण सिंह, मुन्नी देवी ने आचार्य तथा वेदी का पूजन किया।