आगरा पुलिस जिले के लाइसेंसी असलाह धारकों की कुंडली खंगाल रही है। इनमें 64 लाइसेंसी धारकों के पास 11401 कारतूस का हिसाब नहीं मिला है। वहीं 250 खोखे पुलिस को दिखाए गए। इससे माना जा रहा है कि इनका इस्तेमाल हर्ष फायरिंग में किया गया होगा, क्योंकि आत्मरक्षा में गोली चलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं है।
एसएसपी अमित पाठक ने शस्त्र की दुकानों से अधिक संख्या में कारतूस लेने वाले शस्त्र धारकों को डेटा मांगा था। इसमें सामने आया कि सात सर्किल के तकरीबन 64 शस्त्र लाइसेंस धारकों ने सबसे ज्यादा कारतूस खरीदे थे। कई साल में 13148 कारतूस खरीदे गए थे। जब पुलिस ने सत्यापन किया तो शस्त्र धारकों ने 250 खोखे दिखाए।
इनके बारे में यह नहीं बताया कि यह कहां इस्तेमाल किए? 1747 कारतूस मिले। शेष 11401 कारतूस कहां गए? इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। अब पुलिस सत्यापन का कार्य पूरा करने के बाद प्रशासन को रिपोर्ट भेजेगी। इसके बाद लाइसेंस निरस्त हो सकते हैं।
...तो अपराधियों को बेचे जा रहे
जिले में अपराधियों के पास आसानी से कारतूस पहुंच जाते हैं। कई बार पुलिस बदमाशों कोे पकड़कर उनसे तमंचे और कारतूस बरामद होने का दावा भी करती है। इससे आशंका है कि लाइसेंसी असलाह धारकों के माध्यम से ही अपराधियों तक यह कारतूस पहुंचते हैं। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है।