नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के खौफ से गुजर रहे कई बिल्डरों के लिए राहत की खबर है। याचिकाकर्ता ने जिन बिल्डिंगों को डूब क्षेत्र में होने का दावा किया था सिंचाई विभाग के नए सर्वे में अधिकांश इस दायरे में नहीं हैं। लेकिन खासपुर स्थित मां गौरी टाउन और दयालबाग स्थित तनिष्क राजश्री नहीं बच पाए हैं। इनका अधिकांश हिस्सा डूब क्षेत्र में है। वहीं, नदी किनारे स्थित 58 निर्माणों में अधिकांश फार्म हाउस नए सर्वे में भी डूब क्षेत्र में हैं।
एनजीटी के आदेश पर सिंचाई विभाग ने 50 और 25 साल के दौरान आई बाढ़ के आधार पर नए सिरे से यमुना के डूब क्षेत्र का निर्धारण किया है। इसी आधार पर सोमवार को आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए), नगर निगम, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग, जलनिगम के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से नए सर्वे के आधार पर डूब क्षेत्र के निर्माणों का चिह्नाकन किया। पोइया घाट से सभी अधिकारी यमुना किनारे सिकंदपुर की तरफ यमुना की तलहटी में बढ़ना शुरू हुए। इस दौरान नदी किनारे स्थित फार्म हाउसों की स्थिति देखी। पुराने सर्वे में एडीए ने जिन निर्माणों को डूब क्षेत्र में चिह्नित किया था, नए सर्वे में भी लगभग सभी निर्माण इसके दायरे में आ रहे हैं। हालांकि नदी किनारे स्थित एक फार्म हाउस जो पिछले सर्वे में डूब क्षेत्र में था, इस बार यह प्रतिबंधित दायरे से बाहर हो गया। इस पर एडीए ने सिंचाई विभाग के सर्वे पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने इस फार्म हाउस की फिर से माप करने को कहा है। अधिकारियों ने सिंचाई विभाग द्वारा डूब क्षेत्र निर्धारण के लिए गाड़े गए पिलर के हिसाब से इन निर्माणों की तुलना की। इसके बाद टीम सिकंदरपुर स्थित वंडर सिटी पहुंची। सिंचाई विभाग ने यहां भी डूब क्षेत्र का निशान लगाया था, मगर, यह निशान निर्माण स्थल से नीचे था। नदी की तरफ स्थित इसकी दीवार का थोड़ा सा हिस्सा जरूर इससे प्रभावित हो रहा था। टीम ने इस निर्माण को भी डूब क्षेत्र से बाहर माना। नए सर्वे में दयालबाग स्थित तनिष्क राजश्री भी डूब क्षेत्र में है।
इसके बाद टीम खासपुर स्थित मां गौरी टाउन पहुंची। नदी की तरफ स्थित इसके दो ब्लॉक डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। जिसमें दर्जनों मकान बने हुए हैं। हालांकि एडीए के मुताबिक यह पूरी कालोनी अवैध है। मां गौरी टाउन पर ही चिह्निकरण का काम खत्म हो गया। शेष निर्माणों पर अगले चरण में निशान लगाए जाएंगे। बता दें, सिंचाई विभाग के इस नए सर्वे पर भी तमाम सवाल उठ रहे हैं। जलनिगम और एडीए के गले से भी यह सर्वे नहीं उतर रहा है।
गौरतलब है कि पर्यावरणविद् डीके जोशी ने एनजीटी में यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए जनहित याचिका दायर की थी। इसके लिए उन्होंने तमाम निर्माणों को डूब क्षेत्र में बताया था। इसमें अपर्णा रिवर व्यू, मंगलम एस्टेट, पुष्पांजलि हाईट्स, पुष्पांजलि सीजंस, विभव वाटिका आदि को डूब क्षेत्र में शामिल किया था।
नए सर्वे में ‘खेल’ पर हैरत में अधिकारी
सिंचाई विभाग के खेल भी निराले हैं। नये सर्वे के मुताबिक पोइया घाट स्थित श्मशानघाट से आगे बढ़ने पर अधिकांश फार्म हाउस डूब क्षेत्र की परिधि में आ रहे हैं, मगर एक फार्म हाउस इस डूब क्षेत्र में नहीं है। सोमवार को विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने मौके पर निरीक्षण किया तो सिंचाई विभाग की यह करतूत देख वह खुद हैरत में पड़ गए। आखिर यह कैसे हो सकता है कि अगल-बगल के सभी फार्म हाउस डूब क्षेत्र में हों और एक इस दायरे से बाहर। अधिकारियों ने इस फार्म हाउस की जांच करने को कहा है।
इस बार दूरी होगी निर्धारित
पिछले सर्वे में सिंचाई विभाग ने सिर्फ डूब क्षेत्र में आने वाले निर्माणों पर निशान लगाए थे, मगर इस बार इन निर्माणों का क्षेत्र भी निर्धारित किया जा रहा है। इस बार उस जगह निशान लगाया जा रहा है, जितना क्षेत्र डूब क्षेत्र की परिधि में है।
सिंचाई विभाग ने लगाए पिलर
डूब क्षेत्र निर्धारण के लिए सिंचाई विभाग ने कंकरीट के कुछ पिलर लगा दिए हैं। इससे पहले विभाग ने डूब क्षेत्र के निशान जमीन, दीवार और पत्थरों पर लगाकर खानापूर्ति कर दी थी। अमर उजाला ने जब इसका खुलासा किया तो विभाग की आंख खुली। विभाग ने डूब क्षेत्र निर्धारित करने वाले यमुना किनारे पिलर लगाना शुरू कर दिया है।