भैरों बाजार स्थित केनरा बैंक भवन ढहने के मामले में एडीए की जांच में निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी नहीं मिली, जिसके बाद बिल्डर को क्लीन चिट दे दी गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भी आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है।
आगरा के भैरों बाजार में बैंक हादसा बिल्डर की लापरवाही की वजह से नहीं माना गया। आगरा विकास प्राधिकरण की ओर से की गई जांच में मानकों की अनदेखी सामने नहीं आई। इस आधार पर बिल्डर को क्लीन चिट दे दी गई। उधर, पुलिस की जांच में बताया गया कि पूर्व में बैंक के भवन को खाली करने के लिए बोला गया था। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने भी बिल्डर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है।
शहर के पुराने बसे भैरों बाजार इलाके में 23 अप्रैल की दोपहर हादसा हुआ था। 56 साल पुरानी केनरा बैंक की शाखा की छत और दीवार ढह गई थी। उस समय बैंक की शाखा में 11 कर्मचारियों के साथ 4 लोग मौजूद थे। भागकर उन्होंने जान बचाई थी। इस हादसे से शहर में वर्षों पुराने भवनों में किए जा रहे निर्माण कार्य और व्यावसायिक बिल्डिंग के निर्माण पर सवाल उठाए गए थे।
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थाना छत्ता के दरोगा योगेश पवार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें लिखा था कि मॉल की खुदाई के लिए लापरवाही पूर्वक निर्माण कार्य किया जा रहा था। इसमें मानकों की अनदेखी की जा रही थी। इस वजह से ही बैंक की बिल्डिंग गिर गई। बैंक के कर्मचारियों और लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ गया। दर्ज प्राथमिकी में कृधा अर्थ डेवलपर्स एलएलपी के मालिक राकेश कोहली, कृष्णा भू विकास एलएलपी के मालिक विनोद कुमार अग्रवाल और अज्ञात बिल्डर को आरोपी बनाया गया।
पुलिस ने मानकों की अनदेखी के लिए आगरा विकास प्राधिकरण से रिपोर्ट मांगी थी इसके लिए एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने पिछले दिनों पुलिस को अपनी रिपोर्ट दी। इसमें लिखा गया कि मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य किया जा रहा था, हादसे की वजह भवन का कमजोर होना माना गया। इस आधार पर पुलिस ने भी केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है।