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Budget 2020: आगरा के जूता कारोबार को मिली ताकत, अब चीन की चुनौती से करेगा मुकाबला

Sun, 02 Feb 2020 02:40 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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दुनिया के बाजारों में आगरा का जूता चमक रहा है, लेकिन घरेलू जूता बाजार में सस्ते चाइनीज जूतों ने सबसे ज्यादा नुकसान आगरा के जूता उत्पादकों को पहुंचाया। शनिवार को पेश किए गए आम बजट में जूतों पर आयात शुल्क 25 से बढ़ाकर 35 फीसदी कर दिया गया। 
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इससे आगरा की गली-गली में बन रहा जूता चाइनीज जूतों की चुनौती से मुकाबला कर पाएगा। चाइनीज समेत विदेशी जूतों पर आयात शुल्क बढ़ने से यह महंगे हो जाएंगे, जिससे आगरा में बनने वाले जूते देश भर के बाजार में उनसे कीमत में मुकाबला कर पाएंगे। 

देश के 65 फीसदी घरेलू जूता बाजार पर आगरा का कब्जा है यानी दो तिहाई लोग आगरा में बना जूता पहनते हैं। 8500 इकाइयों में साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। चीन के सस्ते, लेकिन घटिया क्वालिटी के जूतों ने आगरा को जोर का झटका दिया।
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आगरा में जूता कारोबार आंकड़ों की नजर में 
65 फीसदी हिस्सेदारी है घरेलू बाजार में
20 हजार करोड़ रुपये का कारोबार
8500 इकाइयां जुटी हैं जूता निर्माण में
3.50 लाख लोगों को मिल रहा रोजगार

'घरेलू उत्पादकों को ताकत देने वाला बजट'

सस्ते होने के कारण बड़ा वर्ग चीन के स्टाइलिश, लेकिन सिंथेटिक लेदर के बने जूतों का उपयोग करने लगा। इनके आयात पर प्रतिबंध की मांग उठी तो बजट में वित्त मंत्री ने आयात महंगा कर दिया। आगरा में बनने वाले और विदेशी जूतों के बीच प्रति जोड़ी 25 से 50 रुपये का ही अंतर था, जो आयात शुल्क बढ़ाने से खत्म हो जाएगा। इसका फायदा जूता उत्पादकों को सीधे तौर पर मिलेगा।

आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) के अध्यक्ष पूरन डावर ने बताया कि बेहद संतुलित और घरेलू उत्पादकों को ताकत देने वाला बजट है। टैक्स ऑडिट की सीमा एक करोड़ से बढ़ाने और आयात शुल्क बढ़ाने के कदमों का अच्छा असर उद्योगों पर पड़ने वाला है। 

आगरा शू मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जितेंद्र त्रिलोकानी ने बताया कि हम कम कीमत के कारण चाइनीज जूतों से मुकाबला नहीं कर पा रहे थे। आयात शुल्क बढ़ाने के कदम से सबसे बड़ा फायदा आगरा को ही होगा। घरेलू जूता कारोबार इससे बढ़ेगा, हमारी हिस्सेदारी और बढ़ेगी।
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'घरेलू जूता उद्योग उड़ान भर पाएगा'

एफमेक के सदस्य प्रदीप वासन ने बताया कि आयात शुल्क बढ़ाने से घरेलू जूता उद्योग उड़ान भर पाएगा, लेकिन निर्यातकों को फुटवियर कंपोनेंट महंगे मिलेंगे। हालांकि जूता उद्योग के लिए कुल मिलाकर बजट ठीक है। 

सोल निर्माता दिलीप मित्तल ने बताया कि जूते के लिए इंसेटिव और अन्य रियायतों की उम्मीद थी। हालांकि आयात शुल्क बढ़ाने का कदम अच्छा है। घरेलू जूता कारोबारियों को इसका बड़ा फायदा पहुंचने वाला है। 

जूता निर्यातक नजीर अहमद ने कहा कि फुटवियर कंपोनेंट पर 15 से बढ़ाकर 20 फीसदी आयात शुल्क कर दिया गया। इससे हमारी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। क्वालिटी कंपोनेंट तो आयात ही करना पड़ रहा है। मेरे हिसाब से निराशाजनक बजट है। 
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