यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने का असर बाजार पर दिखने लगा है। मुद्राओं यूरो और पाउंड की कीमतें धड़ाम हुईं तो आगरा के जूता निर्यातक और हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों के माथे पर पसीना आ गया। इससे आगरा के जूते का निर्यात प्रभावित हो जाएगा।
पहले ग्रीस संकट और फिर यूरोपीय यूनियन के कई देशों में छाई मंदी से आगरा का जूता निर्यात बीते साल से नुकसान में है। न केवल रुपये, बल्कि डॉलर के टर्म में भी निर्यात में घाटा हुआ है।
आगरा से जूते का सबसे ज्यादा निर्यात यूरोपीय देशों को ही होता है। आगरा के कई बड़े ब्रांड यूरोप में टॉप 10 में जगह बनाए हुए हैं। जर्मनी, इंग्लैंड, इटली, फ्रांस, स्पेन, नीदरलैंड, डेनमार्क, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, पुर्तगाल, ग्रीस, पोलैंड आदि देशों में ही सबसे ज्यादा जूता निर्यात किया जाता है। अप्रैल से जनवरी के लेदर एक्सपोर्ट के आंकड़ों में सात फीसदी की गिरावट आई है। ब्रेग्जिट को लेकर निर्यातक चिंतित हैं। परेशानी यह है कि जो आर्डर लिए हैं, उन्हें पूरा कैसे करें। महज 24 घंटे में ही रुपये के मुकाबले पाउंड 97 से घटकर 92 रुपये पर आ गया। कुछ दिनों पहले यह 104 रुपये थी। इसी तरह यूरो की कीमत कम हुई है। पाउंड में मिले आर्डर पर इस घाटे की भरपाई निर्यातक कै से कर पाएंगे।
इन देशों से मांग में कमी
देश कमी
जर्मनी -18.5 %
इंग्लैंड - 4.6 %
इटली -20.8 %
फ्रांस -19.1 %
हांगकांग -26.8 %
स्पेन -9.3 %
नीदरलैंड -19.6 %
ग्रीस - 22.6 %
स्विट्जरलैंड - 22.7 %
बेल्जियम - 28.5
‘यूरोप में पहले ही मंदी थी, अब ब्रेग्जिट के कारण आगरा के जूता निर्यात पर इसका असर पड़ेगा। हमारे उत्पादों को ज्यादा कंपटीशन झेलना होगा और मुनाफा भी बेहद कम हो जाएगा। ब्रेग्जिट से निर्यातकों में चिंता है।’
पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
‘ब्रेग्जिट के कारण यूरो और पाउंड में जबरदस्त गिरावट हुई है। इससे हमारे उत्पाद की कीमत हमें कम मिलेगी। पहले ही जूता निर्यात में भारी गिरावट आई है। अब इससे बाजार पर बुरा असर पड़ना तय है’
नजीर अहमद
पूर्व अध्यक्ष, एफमेक
‘ब्रेग्जिट के कारण पाउंड में जो कमी आई है, उससे भारत पर बुरा असर पड़ेगा ही। जो लोग इंग्लैंड से अपने परिवारों को पैसे भेजते थे, वह तो कम मिलेंगे ही, आगरा से हैंडीक्राफ्ट और जूता निर्यात को नुकसान होना तय है। निर्यातकों के लिए यह बहुत विपरीत परिस्थिति है।’
अनिल वर्मा
पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चेंबर