ब्रज मंडल बना बल्केश्वर, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब। फोटो : मोनिका
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आगरा। भादों की अष्टमी को जब भगवान कृष्ण ने अवतार लिया तो देवकी ने उनसे बालक का रूप धारण करने का आग्रह किया। इससे पहले भगवान ने वसुदेव को आज्ञा दी कि उन्हें गोकुल छोड़ आएं। देवकी को दुखी देख ठाकुर जी ने कहा कि ठीक 11 साल और 56 दिन बाद हम आपके पास आ जाएंगे। बुधवार को बल्केश्वर भक्त मंडल की ओर से आयोजित श्रीमदभागवत कथा में कथावाचक इंद्रेश जी ने कृष्ण जन्म और बाल लीलाओं का वर्णन किया।
बल्केश्वर पार्क में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथ दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शाम 4 बजे शुरू होने वाली कथा के लिए पंडाल दोपहर 3:30 बजे ही पूरी तरह भर गया। कथा के अंत में भव्य नंदोत्सव मनाया गया, जिसमें नंद के आनंद भये जय कन्हैया लाल की के जयकारों के साथ खिलौने आदि बांटे गए। कथा के विराम से पहले करके इशारे बुलाए गई रे बरसाने की छोरी भजन पर श्रद्धालु अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर झूमते नजर आए।
माता-पिता को सताने वालों के लिए नर्क
इंद्रेश महाराज ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार अत्यधिक क्रोध करने वाले, कटु वचन बोलने वाले, असंतोषी और अपने माता-पिता को शत्रु मानकर उनसे दूर रहने वाले लोगों का नर्क का रिजर्वेशन कन्फर्म समझना चाहिए।
कथावाचकों के विरोध पर छलका दर्द
उन्होंने कहा, दुर्भाग्य है कि आज सनातन धर्म के लोग ही कथावाचकों का विरोध कर रहे हैं। समाज में हो रहे अपराधों और बेटियों के अपमान पर कोई सवाल नहीं उठाता, लेकिन हरिनाम सुनाकर लोगों की भावना पवित्र करने वाले कथावाचकों को निशाना बनाया जाता है।