ब्रज में होली के रंगों का उल्लास अद्भुत है। होली के इस आनंद की अनुभूति के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक मथुरा आते हैं। इस दौरान पर्यटकों का आकर्षण बरसाना की लठामार होली के साथ रंगभरनी एकादशी को वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर में उड़ने वाले रंग तक सीमित रहता है। लेकिन इस बार होली के उत्सव को और व्यापक तथा भव्य बनाने की योजना शुरू हो गई है।
कहावत है सब जग होरी या ब्रज होरा। ब्रज में पूरे 40 दिन तक होली के रंग बरसते हैं। कहीं रंगों से खेलते हैं तो कहीं फूलों से होली होती है। मंदिरों में तो यहां प्रत्येक दिन होली के खास आयोजन किए जाते हैं। बरसाना, बांकेबिहारी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान की होली को छोड़ दें तो अधिकांश आयोजन स्थानीय बनकर रह गए हैं।
वहां तक पहुंचने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं होते है। जनसुविधाओं का भी पूरी तरह से अभाव रहता है, लेकिन अब इन्हें पर्यटन मानचित्र पर लाने की प्लानिंग बनाई गई है। इसमें उन सभी आयोजनों की सूची बना ली गई है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इस बार तमाम स्थानों पर पुलिस, प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है।
यहां है होली के आकर्षण
इसे लेकर शुक्रवार को ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस दौरान सीईओ नगेंद्र प्रताप, गोकुल चेयरमैन संजय दीक्षित, बरसाना से भगवान सिंह, नंदगांव से बच्चू सिंह, बलदेव से कमल पांडेय, द्वारिकाधीश मंदिर से राकेश तिवारी एड, दाऊजी मंदिर से ब्रजेश पांडेय मौजूद रहे।
ये है आकर्षण--
- बरसाना की लठामार होली और लड्डूमार होली।
- नंदगांव की लठामार होली।
- श्रीकृष्ण जन्मस्थान की रंगभरनी होली।
- वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर में रंगों की होली।
- मंदिर द्वारिकाधीश में बगीचा की होली।
- चतुर्वेदी समाज का मथुरा में डोला।
- गोकुल में छड़ीमार होली।
- बलदेव का हुरंगा।
- गोवर्धन के गांव मुखरई में चरकुला नृत्य।
- कोसीकलां के गांव फालैन में होली की आग से पंड़ा की निकासी।
- गांव रावल में लठामार होली।
ब्रज तीर्थ विकास परिषद होली की मार्केटिंग भी करने करने जा रहा है। इसके लिए होली के आयोजनों की वीडियोग्राफी के साथ उसका लाइव प्रसारण कराने की भी योजना है।