मथुरा। वृंदावन के रंगजी मंदिर में श्रीब्रह्म उत्सव के दौरान सूर्यप्रभा रथ पर सवार भगवान रंगनाथ।
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वृंदावन (मथुरा)। ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन भगवान रंगनाथ ने सूर्य के ब्रह्मांड में प्रवेश किया। सूर्य के ब्रह्मांड में सूर्य प्रभा रथ पर सवार होकर गए। उनके इस स्वरूप को देखकर भक्तगणों ने ध्यान की मुद्रा में उनके दर्शन किए और भगवान गोदा रंगमन्नार के जयकारे लगाए।
रंगनाथ मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन सूर्यप्रभा की सवारी निकली। शुक्रवार की प्रात: भगवान गोदा रंगमन्नार सूर्यप्रभा वाहन पर विराजमान हो कर निकले। भगवान सूर्य ब्रह्मांड में प्रकाश करते हैं लेकिन उनके अंदर प्रभु ही हैं क्योंकि स्वयं नारायण उन सवित्रदेव के मध्य विराजमान होकर अपनी शक्ति से सूर्यदेव का निर्माण किए हैं। मान्यता है कि इस सवारी में बैठे प्रभु के दर्शन करने से भक्तों के दृष्टि दोष दूर हो जाते हैं।
स्वर्ण रचित सूर्यप्रभा में विराजमान भगवान गोदारंगमन्नार की छवि अलौकिक दिखे। दिव्य मधुर पारंपरिक धार्मिक संगीत के बीच भगवान रंगनाथ निज मन्दिर से निकलकर सबसे पहले बारहद्वारी स्थित मंडप के सम्मुख पहुंचे जहां मन्दिर सेवायतों द्वारा मंत्रोच्चारण किया गया। इसके बाद भगवान की सवारी बगीचा तक गई जहां आरती करने के बाद भगवान को कुछ देर के लिए विश्राम कराया गया। यहां विश्राम करने के बाद भगवान की सवारी पुन: मंदिर पहुंची। सवारी के आगे आगे चल रहा गजराज सभी के आकर्षण का केंद्र रहा। शुक्रवार की शाम को श्री हंस की सवारी निकली। इस सवारी पर भगवान रंगनाथ का अद्भुत शृंगार के दर्शन करने को मिले।