आगरा के बाह के बेसंगपुरा गांव में सोमवार की शाम करीब 6:30 बजे निर्माणाधीन छत समेत गिरी सीढ़ी के मलबे में दबने से फौजी धर्मेंद्र सिंह के बड़े बेटे अर्पित (12) की मौत हो गई। पास में ही खेल रहे उनके जुड़वा बच्चे रामू और श्यामू बाल-बाल बचे। मलबे में दबने से दो मजदूर घायल हो गए।
बेसंगपुरा गांव में तहसीलदार के मकान का निर्माण कार्य चल रहा है। सोमवार की शाम 6.30 बजे गांव के ही मजदूर आलिम, आरिफ छत तक बनी सीढियों पर रखी ईंट और बालू हटा रहे थे। सीढि़यों के पास धर्मेंद्र सिंह के तीनों बेटे खेल रहे थे। इसी दौरान छत का एक पत्थर टूटने से निर्माणाधीन मकान की सीढि़यां भरभरा कर गिर गई। पिलर भी ढह गए। मलबे में अर्पित, आरिफ, आलिम दब गए। रामू और श्यामू बाल-बाल बचे। चीख पुकार पर पहुंचे गांव के लोगों ने मलबा हटाकर तीनों को बाहर निकाला और इलाज के लिए बाह सीएचसी पर भर्ती कराया। जहां पर चिकित्सकों ने अर्पित को मृत घोषित कर दिया। जबकि दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद एसएन मेडीकल कॉलेज आगरा भेज दिया। अर्पित की मौत से परिवार में मातम छा गया।
अयोध्या में तैनात है फौजी, पत्नी हुई बेसुध
बेसंगपुरा के धर्मेंद्र सिंह की अयोध्या में पोस्टिंग है। परिजन ने बताया कि जनवरी में घर पर 5 दिन की छुट्टी पर आए थे। पत्नी भूरी देवी गांव में ही है। सोमवार की शाम अर्पित की दर्दनाक मौत की खबर से धर्मेंद्र सिंह बेहाल हो गए। कुछ देर बाद अयोध्या से घर के लिए निकल लिए थे। जबकि बेटे का शव देख कर फौजी की पत्नी भूरी देवी भी बेहोश हो गई। अर्पित को अस्पताल लाने वाले उसके ताऊ रविंद्र सिंह मौत की पुष्टि होते ही बेहोश हो गए। बोले कि छोटे को क्या जवाब दूंगा?
तेज आवाज के साथ गिरे निर्माणाधीन मकान पर पहुंचे लोग
बेसंगपुरा में निर्माणाधीन मकान गिरा तो तेज आवाज हुई थी। एक पल को लोग समझ नहीं पाए, जैसे ही मकान गिरने की चीख पुकार मची तो गांव के लोग मौके पर पहुंचे। मलबा हटाकर तीनों को बाहर निकाला। हादसे का मंजर देखने वालों की रूह तक कांप गई।
घायल मजदूर बोले, डॉक्टर साहब हम बच तो जाएंगे
मलबे में दबे मजदूर आरिफ, आलिम अपने जिंदा बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे। हादसे का मंजर उनकी आंखों में तैर रहा था। बाह सीएचसी पर इलाज शुरू हुआ तो दोनों बोल उठे कि डॉक्टर साहब हम बच तो जाएंगे? अपने हाथ-पैर को टटोल रहे थे। सिर की चोट के बारे में पूछ रहे थे। दोनों ने बताया कि ईंट और बालू हटाते समय पत्थर टूटने से हादसा हुआ था। मलबे में दबे तो जिंदगी की उम्मीद छोड़ चुके थे। जान बचने पर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे थे।
http://